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Bilaspur News: 7 फीट जमीन पर सीढ़ियों के निर्माण का विवाद

Sun, 12 Apr 2026 11:02 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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सीनियर सिविल जज कोर्ट ने दिए मौके की जांच के आदेश
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अदालत ने कहा, विवाद सुलझाने के लिए जरूरी है स्थानीय जांच

नायब तहसीलदार घुमारवीं बनाए गए लोकल कमिश्नर

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं उपमंडल में दो पक्षों के बीच आवासीय भूमि को लेकर चल रहे विवाद में सीनियर सिविल जज कोर्ट, घुमारवीं ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए नायब तहसीलदार घुमारवीं को लोकल कमिश्नर नियुक्त कर मौके की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

मामले में वादी पक्ष ने अदालत में दायर सिविल वाद में कहा है कि उसके मकान के साथ करीब 7 फीट जमीन खाली छोड़ी गई थी, जो उसकी स्वामित्व वाली भूमि का हिस्सा है। मकान का निर्माण करीब 50 वर्ष पहले किया गया था और तब से उक्त जमीन उसके कब्जे में है। वादी का आरोप है कि प्रतिवादी ने हाल ही में इस 7 फीट जमीन पर जबरन सीढ़ियों का निर्माण कर दिया है। यह भी कहा गया कि संबंधित भूमि पर प्रतिवादी का कोई अधिकार या स्वामित्व नहीं है। इसी आधार पर अदालत से स्थायी निषेधाज्ञा के साथ-साथ मौके की जांच कराने की मांग की गई थी।
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वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में जवाब दाखिल कर सभी आरोपों को गलत और निराधार बताया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया है और सीढ़ियों का निर्माण उनकी अपनी भूमि पर किया गया है। उन्होंने आवेदन की स्वीकार्यता पर भी सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि मुख्य विवाद यही है कि सीढ़ियों का निर्माण किस भूमि पर किया गया है। अदालत ने कहा कि इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए स्थानीय जांच आवश्यक है, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके और मामले के निपटारे में सहायता मिले।
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नायब तहसीलदार घुमारवीं बनाए गए लोकल कमिश्नर

अदालत ने आदेश देते हुए नायब तहसीलदार घुमारवीं को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके पर जाकर दोनों पक्षों की मौजूदगी में विवादित स्थल का निरीक्षण करें, जमीन की पैमाइश करें और विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। कोर्ट ने लोकल कमिश्नर की फीस 3500 रुपये तय की है, जिसका भुगतान वादी को मौके पर ही रसीद के साथ करना होगा। अदालत ने लोकल कमिश्नर को 12 मई 2026 तक अपनी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट को मुख्य वाद के साथ संलग्न किया जाएगा, जिससे अंतिम निर्णय में सहायता मिल सके।
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