भराड़ी (बिलासपुर)। श्री सरस्वती संस्कृत डिग्री महाविद्यालय डंगार का नाम अब राजकीय संस्कृत कॉलेज होगा। इसकी अधिसूचना शिक्षा विभाग के सचिव राजीव शर्मा ने मंगलवार को जारी की। जब तक यहां नए प्रधानाचार्य कार्यभार नहीं संभाल लेते तब तक घुमारवीं महाविद्यालय के प्रधानाचार्य इसका अतिरिक्त कार्यभार देखेंगे।
11 जून की कैबिनेट में सरकार ने इस कॉलेज को अपने अधीन कर लिया था। इस कॉलेज के अधिग्रहण की मंजूरी के बाद अब इस कॉलेज का नाम बदल दिया गया है। अब सरकारी महाविद्यालयों को मिलने वाली सभी सुविधाएं इस महाविद्यालय को सरकार की तरफ से मिलेंगी। सरकार के इस फैसले से क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है। लोगों ने इस फैसले पर सरकार और खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग का धन्यवाद किया है।
बताते चलें महाविद्यालय 1962 से संचालित है। 1962 में रामनवमी के दिन डॉ. दीनानाथ ने इस महाविद्यालय की नींव रखी थी। डॉ. दीनानाथ ने शिक्षा विभाग से शास्त्री के पद से त्यागपत्र देकर स्थानीय मंदिर में संस्कृत महाविद्यालय शुरू किया था। वर्ष 1983 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हुई थी। 1984 में इस कॉलेज में परीक्षा केंद्र बना।
वर्ष 1985 से राज्य सरकार की तरफ से आंशिक अनुदान मिलना शुरू हुआ। 1987 से केंद्र सरकार से अनुदान मिलने लगा। इस समय करीब 90 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं।
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रकाश चंद गौतम ने बताया कि महाविद्यालय को सरकार के अधीन करने की मांग लोगों द्वारा की जा रही थी। अब सरकार की देखरेख में यह महाविद्यालय संचालित होगा। यहां शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।