शौचालय, खेल मैदान के उपयोग को लेकर शिक्षा विभाग व स्कूल प्रबंधन आमने-सामने
शिक्षा विभाग के रवैये और लापरवाही के कारण अभिभावकों में आक्रोश
अभिभावक बोले, प्रशासनिक टकराव की कीमत क्यों चुकाएं बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के बच्चों की नियमित कक्षाएं बीते एक माह से नहीं लग रही हैं। इसका कारण शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन के बीच उपजे भ्रम और सामंजस्य की कमी है। नतीजतन सैकड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं अभिभावक अब बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता में है।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से उन्हें छात्र पाठशाला घुमारवीं में केवल कक्षाएं संचालित करने के लिए कमरे उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन शौचालय और खेल मैदान के उपयोग पर रोक की शर्त रखी गई है। प्रबंधन के अनुसार, सहशिक्षा पद्धति में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न होने की स्थिति में नियमित कक्षाएं चलाना संभव नहीं है। यही कारण है कि स्कूल की तरफ से अभिभावकों को मैसेज भेजकर जानकारी दी गई और इस मुद्दे पर फीडबैक भी मांगा गया। शिक्षा विभाग बिलासपुर की उपनिदेशक रेनू कौशल ने स्कूल प्रबंधन के इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई है। जिन कमरों की मांग की गई थी, वे उपलब्ध करवा दिए गए हैं। क्योंकि विद्यालय लड़कों का स्कूल है, इसलिए छात्राओं के लिए शौचालय नहीं है। ऐसे में केवल यही कहा गया कि स्कूल प्रबंधन को लड़कियों के लिए अस्थायी शौचालय की व्यवस्था करनी चाहिए। लड़कों के लिए शौचालय की सुविधा मौजूद है और किसी प्रकार की रोक शौचालय या खेल मैदान के उपयोग को लेकर नहीं लगाई गई है।
इस स्थिति से अभिभावक खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि बिना शौचालय की सुविधा के बच्चे पूरे दिन कक्षाएं कैसे लगाएंगे? वे इसे बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश बता रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग एक-दूसरे पर दोष मढ़कर असल मुद्दे से बच रहे हैं, जबकि नुकसान बच्चों की पढ़ाई का हो रहा है। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुलझी तो वे बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे। उन्होंने इसे शिक्षा के अधिकार कानून का सीधा उल्लंघन बताया और सवाल उठाया कि क्या प्रशासनिक टकराव की कीमत मासूम बच्चों को चुकानी पड़ेगी?