संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। डीएवी जमथल में इस सत्र से छठी से आठवीं तक की कक्षाएं अब बंद नहीं होंगी। लोगों ने इसका विरोध किया था और उपायुक्त बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा था। उपायुक्त ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और अब यह तय हुआ कि इस स्कूल में आठवीं तक बच्चों को शिक्षा मिलेगी। अभी तक कंपनी दुहाई दे रही थी कि उनके पास आठवीं तक का अप्रूवल नहीं है और पिछले साल डीएवी बरमाणा ने जबरन छठी कक्षा यहां शुरू की थी।
लेकिन कहते हैं न कि जनता अगर जागरूक है तो उसे उसके अधिकार से कोई वंचित नहीं रख सकता है। इसकी ताजा मिसाल देखने को तब मिली जब एनटीपीसी कोलडैम परियोजना में संचालित डीएवी पब्लिक स्कूल को कंपनी प्रबंधन ने पांचवीं कक्षा तक कर दिया था। जबकि पिछले शैक्षणिक सत्र में इस स्कूल में छठी कक्षा बैठाकर इसे माध्यमिक स्कूल का दर्जा दे दिया गया था।
वहीं अब लोगों के विरोध के बाद इसमें फिर से आठवीं तक कक्षा बैठाने का निर्णय लिया गया है। जैसे ही स्कूल का दर्जा कम करने की सूचना लोगों को मिली तो कंपनी की मनमानी के खिलाफ समाजसेवी और अधिवक्ता सुमन ठाकुर की अगुवाई में लोगों ने आवाज बुलंद की। उपायुक्त और सीएम जयराम ठाकुर को ज्ञापन सौंपा गया।
ग्राम पंचायत प्रधान कल्पना देवी, देशराज, विस्थापितों और कमेटियों ने मिलकर इसका विरोध किया। उपायुक्त ने कंपनी प्रबंधन से जवाबदेही मांगी थी। अब कंपनी ने कहा कि उन्हें यहां पर आठवीं तक कक्षाएं शुरू करने का अप्रूवल मिल चुका है।
सुमन ठाकुर ने उपायुक्त, सीएम, पंचायत प्रधान व अन्य प्रतिनिधियों का आभार जताया है। कहा कि स्कूल का दर्जा बढ़ाए जाने से अब 3 पंचायतों जमथल, धौन कोठी, हरनोड़ा के बच्चों को 40 किलोमीटर दूर बिलासपुर पढ़ने नहीं जाना होगा। कंपनी से मिलने वाला सीएसआर का पैसा कोलडैम विस्थापितों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च होना चाहिए। ताकि उन्हें गुणात्मक शिक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि वह इस विषय को जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के समक्ष उठाएंगे।