घुमारवीं में सिर खड्ड पर अब नहीं बनेगी कृत्रिम झील
भू-सर्वेक्षण विभाग के सर्वे में जगह नहीं उपयुक्त, स्वीकृत बजट से कई गुना ज्यादा खर्च
सुरेंद्र जम्वाल
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं में सीर खड्ड पर वर्षा जल संग्रहण करके जल शक्ति विभाग की ओर से बनाई जाने वाली कृत्रिम झील अब नहीं बनेगी। विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार जिस स्थान पर झील को बनाया जाना था, भू-सर्वेक्षण विभाग के सर्वे के बाद यह स्थान उपयुक्त नहीं पाया गया है। जो लागत दर्शाई गई है उससे कई गुना ज्यादा लागत आएगी। इसके चलते अब कृत्रिम झील नहीं बनेगी।
अगर कृत्रिम झील बन जाती तो घुमारवीं शहर में पर्यटन को बढ़ावा मिलता। कृत्रिम झील को जल संग्रहण करके बनाया जाना था। इससे शहर में पानी की समस्या से भी निजात मिल जाती। जल संग्रहण बांध सीर खड्ड के ऊपर बनाए जाने थे। एक घुमारवीं और दूसरा ओढी में बनना था। झील लगभग 9 करोड़ की लागत से बनकर तैयार होनी थी।
कृत्रिम झील को बनाने का बीड़ा पूर्व सरकार ने उठाया था। इसका शिलान्यास 29 दिसंबर 2014 को तत्कालीन सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने किया था। झील पर जो चेकडैम बनने थे उनमें बड़े-बड़े लोहे के गेट लगने थे। बिजली उत्पादन भी किया जा सकता था। इससे घुमारवीं क्षेत्र के लोगों को बिजली की सुविधा प्राप्त होती और साथ में चेकडैम बनने से सिंचाई और पेयजल योजना का भी लाभ मिलता। स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलते। वोटिंग व किश्तियों की सुविधा भी उपलब्ध होनी थी। स्थानीय दुकानदारों के कारोबार को भी पंख लगते, जो अब सपना बनकर रह गया है।
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एक्सईएन सतीश शर्मा ने कहा कि जिस स्थान पर कृत्रिम झील बननी थी वह भू-सर्वेक्षण विभाग की टीम के सर्वे के बाद उपयुक्त नहीं पाई गई है। जो बजट पहले बताया गया था उससे कई गुना ज्यादा खर्चा आ रहा था। झील नावार्ड के तहत बननी थी। अब बजट के अभाव में नहीं बनेगी।
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पूर्व सीपीएम राजेश धर्माणी ने कहा कि राजनीति भेदभाव के चलते योजनाओं को बंद किया जा रहा है जो निंदनीय है। इस योजना का पैसा भी विभाग के पास उपलब्ध हो चुका है। ऐसी योजना को बंद करना राजनीतिक भेदभाव ही दर्शाता है।