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चिट्टा कर रहा शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य को तबाह : पराशर

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छड़ोल स्कूल में बच्चों को संबोधित करते एसएचओ सदर। संवाद
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छड़ोल स्कूल में पुलिस ने बच्चों को बताए नशे के दुष्प्रभाव
नशे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय सही संगत,मजबूत इच्छाशक्ति
आयोजित किया एंटी-चिट्टा जागरूकता,सड़क सुरक्षा कार्यक्रम


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नशे के खिलाफ जिला पुलिस की ओर से चलाए जा रहे अभियान को मजबूती देते हुए सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय छड़ोल में सदर थाना ने एंटी-चिट्टा अवेयरनेस और रोड सेफ्टी कार्यक्रम के तहत बच्चों को जागरूक किया। कार्यक्रम में एसएचओ सदर राजेश पराशर मुख्य वक्ता रहे।
कार्यक्रम में विद्यालय के करीब 100 छात्र-छात्राएं, शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण स्टाफ ने भाग लिया। थाना प्रभारी पराशर ने सबसे पहले युवाओं में तेजी से फैल रहे चिट्टा के खतरे पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि चिट्टा जैसे घातक मादक पदार्थ युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को तबाह कर देते हैं। परिवार टूटते हैं, पढ़ाई और करियर बर्बाद हो जाते हैं और अपराध की ओर बढ़ने की आशंका भी बढ़ जाती है।
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छात्रों को समझाया कि नशे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय सही संगत, मजबूत इच्छाशक्ति और समय पर जागरूकता है। पुलिस चिट्टा तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है, लेकिन समाज और युवाओं की भागीदारी से ही इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। चिट्टा जागरूकता के साथ ही कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई। एसएचओ राजेश पराशर ने छात्रों को सड़क हादसों के प्रमुख कारणों तेज रफ्तार, मोबाइल फोन का उपयोग, बिना हेलमेट बाइक चलाना, सीट बेल्ट न लगाना और गलत दिशा से वाहन चलाने के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि अक्सर छोटी-सी लापरवाही बड़ा हादसा बना देती है, इसलिए सड़क पर अनुशासन और नियमों का पालन हर नागरिक की जिम्मेदारी है। छात्रों को हेलमेट की गुणवत्ता पहचानने, रिफ्लेक्टर के उपयोग और पैदल यात्री नियमों की भी जानकारी दी गई। इंटरैक्टिव सत्र में छात्रों ने पुलिस अधिकारियों से कई सवाल पूछे। चिट्टा तस्करी,कानूनी कार्रवाई,सड़क हादसों में जिम्मेदारी,हेलमेट की वैधता आदि पर चर्चा की। एसएचओ ने सभी सवालों के जवाब सरल भाषा में दिए। कार्यक्रम के अंत में छात्रों व स्टाफ ने नशे से दूर रहने, नशा करने वालों को रोकने तथा सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की सामूहिक शपथ ली।
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राजेश पराशर ने कहा कि पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य युवाओं को नशे से सुरक्षित रखना और सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विभिन्न स्कूलों और संस्थानों में लगातार आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक युवा लाभान्वित हो सकें।
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