बीआईएस कार्यशाला में अधिकारियों को दी गुणवत्ता और हॉलमार्किंग की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सोने के आभूषण खरीदते समय केवल हॉलमार्क देखकर संतुष्ट न हों। गहने पर बीआईएस का लोगो, शुद्धता का अंक और छह अंकों की एचयूआईडी संख्या जरूर जांचें। इन तीनों की मौजूदगी ही वास्तविक बीआईएस हॉलमार्क की पहचान है। यह जानकारी जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला में दी गई।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के शाखा कार्यालय परवाणू की ओर से जिला प्रशासन के सहयोग से जिला स्तरीय अधिकारियों के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में सामान की खरीद करते समय मानकीकृत और आईएसआई मार्क वाले उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए। इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीद में अनिवार्य मानकों की जांच करने के निर्देश भी दिए।
बीआईएस शाखा कार्यालय परवाणू के निदेशक शिव प्रकाश ने बताया कि आभूषण खरीदते समय ज्वैलर की इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन का विधिक माप विज्ञान विभाग से सत्यापन होना जरूरी है। मशीन की सटीकता एक मिलीग्राम तक होनी चाहिए और दुकान में सत्यापन प्रमाणपत्र प्रदर्शित होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि आभूषणों की वैज्ञानिक जांच अधिकृत एसेइंग एवं हॉलमार्किंग केंद्र में होती है। शुद्धता प्रमाणित होने के बाद ही हॉलमार्क लगाया जाता है। हॉलमार्किंग के लिए निर्धारित शुल्क 45 रुपये प्रति वस्तु है, जिसे बिल में अलग से दर्शाया जाता है। इसके अलावा अतिरिक्त शुल्क लेना नियमों के खिलाफ है।
उपभोक्ता बीआईएस केयर एप से हॉलमार्क वाले आभूषण की प्रामाणिकता जांच सकते हैं। आईएसआई मार्क के दुरुपयोग या गुणवत्ता संबंधी शिकायत भी ऐप के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है। तौल या हॉलमार्किंग से जुड़ी शिकायत के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर संपर्क किया जा सकता है।
सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान बिलासपुर प्रवीण सीउटा ने खरीदारी के समय बिल लेने और एमआरपी, निर्माण एवं पैकिंग तिथि तथा शुद्ध वजन जांचने की अपील की। कार्यशाला में पेयजल के विभिन्न भारतीय मानकों की जानकारी भी दी गई। इस दौरान अतिरिक्त उपायुक्त रूपिंदर कौर, बीआईएस के प्रणय जैन, विक्रम आचले, पंकज पटियाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।