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लॉक डाउन से फोटोग्राफरों की रोजी रोटी पर लगा ग्रहण

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शाहतलाई (बिलासपुर)। कोरोना वायरस के भय और लॉक डाउन के चलते इस साल शादियों और अन्य सामाजिक समारोहों का पीक सीजन पूरी तरह से खराब हो गया है। 15 अप्रैल से 30 मई तक शादियों के 12 मुहूर्त हैं। लेकिन लॉक डाउन का 17 मई तक बढ़ना व इससे आगे बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिससे मैरेज पैलेस, कैटरिंग व फलावरिंग इंडस्ट्री पूरी तरह ठप हो गयी है। वहीं फोटोग्राफरों की भी रोजी रोटी पर बन गयी है।
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यद्यपि 3 मई तक कोरोना का असर व कर्फ्यू ठीक हो जाता तो 3 मई से 19 मई व जून 13 से 30 के बीच के मुहूर्त में फोटोग्राफी का काम करने वालों को कुछ राहत अवश्य मिल जाती। लेकिन लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ने से उन की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आने लगा है। ऐसी स्थिति में फोटोग्राफी का काम करने वालों के लिए परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो गया है।
फोटोग्राफरों का कहना है कि लॉक डाउन को देखते हुए कुछ शादियां 5 लोगों के लिए परमिशन लेकर हो रही हैं। जिस में बैंडबाजा व फोटोग्राफर लिस्ट से बाहर हो रहे है। इसके कारण फोटोग्राफर का काम करने वाले लाखों परिवारों को परिवार का गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है। फोटोग्राफर प्रकाश चंद, वीरी सिंह वर्मा, ओकार सिंह ठाकुर, अजय कुमार, प्रेम चंद, प्रकाश चंद, राकेश कुमार, राजेश वनियाल, सुरेन्द्र कुमार, मनोज कुमार, राकेश शर्मा, शुभम कुमार का कहना है कि 13 मार्च के बाद उन्होंने कोई काम धंधा नहीं किया है। जो शादियों के शुभ मुहूर्त थे। कोरोना की चपेट में आ गए। इस के बाद भी कोई शुभ मुहूर्त न होने से उन का धंधा चौपट हो गया है।
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कहा कि लाखों की लागत से कैमरे खरीद रखे हैं। लेकिन वह एक साल के लिए बंद हो गए हैं। इस सबसे फोटोग्राफर कम्युनिटी बुरी तरह प्रभावित हुई है। फोटोग्राफरों का तो घर ही समारोहों के कार्यो से चलता है। लेकिन कोरोना की वजह से इनके घरों की रोजी रोटी खतरे में है। अगर इसी तरह लॉक डाउन बढ़ता रहा तो इन लोगों के परिवार 2 वक़्त के निवाले के लिए तरस जाएंगे।
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