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Bilaspur News: पुराने रूट छोड़ फोरलेन से दौड़ रहीं बसें, लोगों में रोष

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फोरलेन बनने के बाद स्वारघाट की परिवहन व्यवस्था पटरी से उतरी
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-आठ से दस पंचायतों के लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी

संवाद न्यूज एजेंसी
स्वारघाट (बिलासपुर)। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन शुरू होने के बाद स्वारघाट उपमंडल मुख्यालय को जोड़ने वाली परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निजी बसों के साथ-साथ हिमाचल पथ परिवहन निगम, पंजाब रोडवेज और हरियाणा रोडवेज की अधिकांश बसें अब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग की बजाय फोरलेन से गुजर रही हैं। इससे स्वारघाट और आसपास की आठ से दस पंचायतों के लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बसें आज भी कागजों में पुराने रूट पर संचालित हैं, लेकिन वास्तविकता में फोरलेन से चल रही हैं। इस संबंध में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी बिलासपुर और विभिन्न परिवहन निगमों के डिपो प्रबंधकों को कई बार लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि बिना रूट परमिट फोरलेन से बसों का संचालन नियमों के विपरीत है, इसके बावजूद परिवहन विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा। ग्रामीणों का कहना है कि परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से स्वारघाट का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। सुबह के समय बिलासपुर और चंडीगढ़ के लिए पर्याप्त बस सेवा उपलब्ध नहीं होने से कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आम यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। लोगों ने सरकार से पुराने निर्धारित रूटों पर बसों का संचालन सुनिश्चित करने और स्वारघाट-बिलासपुर के बीच नए बस रूट शुरू करने की मांग की है।
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ग्राम पंचायत कुटेहला के उप प्रधान गुरदेव शर्मा ने कहा कि फोरलेन बनने के बाद अधिकांश बसें स्वारघाट की बजाय सीधे फोरलेन से जा रही हैं। इससे बनेर, गंभरपुल, जामली, छड़ोल, कल्लर, कोठीपुरा और जयनगर क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी हो रही है।

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हुकम सिंह ठाकुर ने कहा कि पुराने निर्धारित रूटों पर चलने वाली बसों का फोरलेन से संचालन नियमों के खिलाफ है। यदि कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। सुबह के समय स्वारघाट से बिलासपुर और चंडीगढ़ के लिए बस सेवा नहीं होने से कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है।

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सुभाष ठाकुर का कहना है कि स्वारघाट को जोड़ने वाली परिवहन व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है। निजी और सरकारी बसों की मनमानी के बावजूद कार्रवाई नहीं होना समझ से परे है। सरकार को जल्द समाधान करना चाहिए।
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अनिल धर्माणी ने कहा कि एचआरटीसी के बेड़े में नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने के बावजूद स्वारघाट क्षेत्र की अनदेखी की गई है। क्षेत्र के लिए नए बस रूट शुरू किए जाने चाहिए। हर व्यक्ति के पास निजी वाहन नहीं है। आम लोगों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
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