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Bilaspur News: बसों में ओवरलोडिंग का खेल जारी, यात्री सुरक्षा दांव पर

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बिलासपुर की एक बस में ओवरलोडिंग। संवाद
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अभियान बे-बस-जिंदगी भाग-9
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विभागीय उदासीनता से की जा रही मनमानी, न जांच और न हो रही कार्रवाई
नियमों की की जा रही अनदेखी, जिले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर उठे सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। जिले में अधिकांश निजी और सरकारी बसों में धड़ल्ले से ओवरलोडिंग की जा रही है। हालात ये हैं कि सड़कों पर दौड़ रहीं कई बसें न केवल यातायात नियमों की अनदेखी कर रही हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को भी भारी जोखिम में डाल रही हैं।
लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर योजनाएं तो खूब बनाते हैं, परंतु जमीनी स्तर पर कार्रवाई का अभाव साफ दिखाई देता है। उच्च स्तरीय निर्देशों के बावजूद बसों की नियमित जांच नहीं की जाती, न ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है। ऐसे में जनता का सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर क्यों विभागीय अधिकारी इन अनियमितताओं पर शिकंजा कसने से बच रहे हैं, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
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जिले भर में निजी और सरकारी बसों में नियमों की अनदेखी आम हो चुकी है। बसों में तेज ध्वनि वाले संगीत सिस्टम बजते रहते हैं, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों के लिए भी परेशानी का कारण बनता है। इसके अलावा क्षमता से अधिक सीटें लगाने, सीटिंग क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को भरने और नियमबद्ध स्टॉपेज का पालन न करने जैसी समस्याएं रोज सामने आती हैं।
यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब किसी दुर्घटना के बाद विभाग कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन समय बीतने के साथ ये दावे कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। बिलासपुर, घुमारवीं, भराड़ी, कुठेड़ा, बरठीं, झंडूता, शाहतलाई, डंगार, लदरौर, ब्रह्मपुखर, जुखाला सहित कई क्षेत्रों में रोजाना ऐसी बसें देखी जा सकती हैं, जिनमें क्षमता से अधिक सवारियां भरी होती हैं। कई बार तो बसें इस कद्र भरी होती हैं कि यात्रियों को दरवाजों पर लटककर सफर करना पड़ता है।
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स्थिति इतनी खराब है कि कुछ बसें तो स्टैंड पर यात्रियों को उतारने-चढ़ाने के बजाय बीच सड़क पर ही रुककर अवैध तरीके से यात्रियों को उठाती हैं। प्रशासन और परिवहन विभाग समय-समय पर सख्ती बरतने का दावा तो करते हैं, किंतु इन दावों का असर जमीनी स्तर पर दिखता नहीं। कई बार बस संचालक भी विभागीय कार्रवाई को हल्के में लेते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि सख्त कदम सिर्फ कुछ दिनों की खबर बनकर रह जाएंगे। इस संदर्भ में आरटीओ बिलासपुर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

बिलासपुर की एक बस में ओवरलोडिंग। संवाद

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