फोरलेन सड़क निर्माण के विस्थापित प्रशासन के फरमान पर गुस्से में हैं। प्रशासन ने फोरलेन निर्माण की जद में आने वाले भवन मालिकों को 21 नवंबर तक अपने कब्जे खाली करने का फरमान जारी किया है।
शनिवार तक कब्जे न छोड़ने वाले विस्थापितों से प्रशासन जबरन कब्जा लेगा। जिला प्रशासन के इस फरमान पर बवाल मच गया है। विस्थापितों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। जिला प्रशासन ने विस्थापितों को 21 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया था। उपायुक्त ने साफ शब्दों में कहा था कि लोग खुद भवन खाली कर दें नहीं तो जबरन कब्जा लिया जाएगा। बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग कब्जे छोड़ने को तैयार नहीं है।
किरतपुर से नेरचौक तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क का कार्य इन दिनों जोरों पर चला हुआ है। इसके लिए कई मकान और अन्य ढांचे अधिग्रहित किए गए हैं। लगभग 324 लोग ऐसे हैं जिनके मकानों का अधिग्रहण करने के बाद बाकायदा मुआवजा भी प्रदान किया गया है।
लेकिन, अभी तक इन्हें खाली नहीं किया जा रहा। उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर ने इस संदर्भ में भारतीय राष्ट्रीय प्राधिकरण अधिनियम की धारा 3ई (2) के तहत 21 नवंबर तक का अल्टीमेटम देते हुए मुआवजा खाली करवाने का फरमान जारी किया है। इस पर विस्थापित नाराज हो गए हैं।
पलंथी के विस्थापितों ने एसडीएम सदर से मुलाकात करते हुए भवन खाली करवाने के लिए कुछ और दिनों की मोहल्लत मांगी है तो ऋषिकेश में विस्थापितों ने बैठक आयोजित कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। डीसी मानसी सहाय ठाकुर ने बताया कि सभी को दो-दो बार नोटिस भी दिए गए हैं। मुआवजा भी दिया है। लिहाजा, जगह तो खाली करनी ही होगी। कानूनी तौर पर इसमें कुछ नहीं किया जा सकता।
ऋषिकेश में बैठक कर बनाई रणनीति
बिलासपुर। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति की बैठक ऋषिकेश में प्रधान कृष्ण सिंह चंदेल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में भवन मालिकों को उनके कब्जे हटाने के लिए फरमान जारी करने का कड़ा विरोध किया गया। समिति का आरोप है कि प्रशासन फोरलेन सड़क का निर्माण कर रही कंपनी के इशारे पर कार्य कर रहा है। प्रभावितों और विस्थापितों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि जो रवैया प्रशासन और कंपनी अपना रही है, वह न्यायसंगत नहीं। लोगों की बिजली-पानी की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
पहले उनकी आवाज को दबाने के लिए पहले विस्थापितों के साथ पुलिस बल का प्रयोग हुआ और अब बुल्डोजर चलाने की तैयारी है। राकेश कुमार, बलदेव शर्मा, भगत राम, श्रवण कुमार, जगदीश कुमार, गोपाल दास, अमित कुमार, जगदीश रणौत, कृष्णु राम, विद्या देवी, बिंद्रा देवी, वीना देवी, कृष्णी देवी, चिंता देवी, प्रेम लाल, महेंद्र सिंह, प्यारे लाल, हरमेश, संतराम, प्रकाश चंद, मदन लाल मौजूद रहे।
एसडीएम से मिलकर मांगी मोहल्लत
किरतपुर से नेरचौक फोरलेन की जद में आए लोगों के मकान खाली करवाने के फरमान मिलने के बाद पलंथी के विस्थापितों ने एसडीएम सदर से मुलाकात की। फोरलेन प्रभावित एवं विस्थापित के प्रधान राम सिंह की अध्यक्षता में एडीएम बिलासपुर से मिलकर प्रशासन से मकान खाली करवाने के लिए समय मांगा है।
लोगों का कहना है कि करीब छह माह पहले मकान का मुआवजा मिला है। कई लोगों के मकान अभी बने ही नहीं है। ऐसे में एकाएक मकान खाली करवाने का फरमान तर्क संगत नहीं है। उन्होंने मांग की है कि मकान बनाने के लिए कुछ और समय दिया जाए। इस दौरान प्रेम लाल शर्मा, ज्ञान चंद, प्रकाश चंद, रमेश कुमार, रणजीत, रामचंद, दिनेश कुमार, बालक राम, अशोक कुमार उपस्थित थे।