विशेष न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने सुनाया फैसला
स्वतंत्र गवाह मुकरा, पुलिसकर्मियों के बयानों में भी विरोधाभास
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर।। करीब तीन वर्ष पुराने 6.46 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी मामले में विशेष न्यायाधीश, घुमारवीं की अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के सचेत और विशिष्ट कब्जे में था।
मामला थाना 4 मार्च 2023 को दर्ज एफआईआर से संबंधित था। पुलिस ने दोनों युवकों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत चालान पेश किया था। अभियोजन के अनुसार 4 मार्च 2023 को पुलिस टीम बरठीं क्षेत्र में गश्त पर थी। दोपहर करीब तीन बजे पुलिस ने एक जर्जर भवन के बरामदे में दो युवकों को बैठे देखा। पुलिस का कहना था कि वाहन देखकर दोनों युवक भागने लगे और एक पॉलिथीन कैरी बैग जमीन पर फेंक दिया। बैग की तलाशी लेने पर 6.46 ग्राम हल्के पीले रंग का ठोस पदार्थ बरामद हुआ, जिसे हेरोइन बताया गया। मौके से एक सिरिंज और इलेक्ट्रॉनिक तराजू भी मिलने का दावा किया गया।
जब्त पदार्थ को एसएफएसएल जुंगा भेजा गया, जहां रिपोर्ट में उसे डायसेटाइलमॉर्फीन (हेरोइन) पाया गया। दोनों को 4 मार्च 2023 को गिरफ्तार किया गया। एक आरोपी करीब तीन माह नौ दिन, दूसरा करीब एक माह 15 दिन न्यायिक हिरासत में रहे, बाद में जमानत पर रिहा हुए।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 12 गवाह पेश किए। इनमें पुलिस अधिकारी, जांच अधिकारी और एक स्वतंत्र गवाह शामिल था। अदालत में स्वतंत्र गवाह ने कहा कि उन्हें फोन कर मौके पर बुलाया गया था और बरामदगी की प्रक्रिया उनके सामने नहीं हुई। हालांकि उन्होंने दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार किए। जिरह के दौरान जांच अधिकारी सहित कुछ पुलिसकर्मियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने आरोपियों को बैग फेंकते हुए नहीं देखा। अदालत ने यह भी माना कि घटनास्थल खुला था, वहां कोई चहारदीवारी नहीं थी और पास से लिंक रोड गुजरता था। ऐसे में यह साबित नहीं हो पाया कि बरामद बैग आरोपियों ने ही फेंका था।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में भले ही कुछ परिस्थितियों में आरोपी पर प्रतिकूल अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन उससे पहले अभियोजन को यह सिद्ध करना अनिवार्य है कि बरामद मादक पदार्थ आरोपी के सचेत कब्जे में था। इस मामले में अभियोजन यह मूल तथ्य साबित नहीं कर सका। गवाहों के विरोधाभासी बयानों और स्वतंत्र गवाह के समर्थन न करने से संदेह उत्पन्न हुआ, जिसका लाभ आरोपियों को दिया गया। अदालत ने दोनों आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया। व्यक्तिगत मुचलके रद्द कर दिए गए, जब्त मादक पदार्थ को अपील अवधि समाप्त होने के बाद नष्ट करने के निर्देश दिए गए।