मनरेगा के तहत हुए एक कार्य को लेकर विवाद गहराया
लोकपाल ने लाभार्थी और पंचायत अधिकारियों से जारी किए थे वसूली के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। घुमारवीं विकासखंड के अंतर्गत लुहारवीं पंचायत में मनरेगा के तहत हुए एक कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मनरेगा के तहत पशुशाला निर्माण के मामले में लोकपाल द्वारा जारी आदेशों के खिलाफ लाभार्थी ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
लाभार्थी बालानंद का कहना है कि जब मनरेगा के तहत पशुशाला का निर्माण करवाया गया था, उस समय उनके पास गाय मौजूद थी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी पिछले एक वर्ष से गंभीर रूप से बीमार है और उसका अस्पताल में डायलिसिस चल रहा है। ऐसे हालात में गाय की देखभाल करना संभव नहीं हो पाया, जिस कारण फिलहाल गाय को बेटी के घर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिस्थितियां सामान्य होने और पत्नी के स्वस्थ होने पर गाय को वापस अपने घर ले आएंगे। बालानंद ने कहा कि वह एक ऐसे समाज में रहते हैं, जहां आसपास दर्जनों परिवार रहते हैं। यदि उनके खिलाफ कोई शिकायत थी तो समाज से इस बारे में जानकारी लेना जरूरी था, क्योंकि समाज के लोग भली-भांति जानते हैं कि उनके घर पशु मौजूद थे। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद हुई जांच के दौरान स्थानीय चुने हुए प्रतिनिधि, वार्ड सदस्य के बयान भी दर्ज किए गए थे। वार्ड सदस्य ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा था कि गाय मौजूद थी और उसे मनरेगा के तहत बने कमरे में ही बांधा जाता था। लाभार्थी ने यह भी कहा कि यदि पशुशाला का उपयोग स्टोर के रूप में किया गया होता तो न तो वहां घास होती और न ही पशुओं के चारे से संबंधित औजार मौजूद होते। प्रथम जांच के बाद वह किसी भी पशु को वहां बांध सकते थे, लेकिन घर में सदस्य के बीमार होने और गाय को बेटी के घर रखने की मजबूरी के चलते फिलहाल पशु रखना स्वाभाविक नहीं है। बालानंद का आरोप है कि शिकायतकर्ता ने झूठी शिकायत कर उन्हें बदनाम करने की साजिश रची है। उन्होंने बताया कि गोशाला के बाहर सूचना बोर्ड पहले से मौजूद था, इसके बावजूद जांच में यह कहा गया कि सूचना बोर्ड ताजा लिखा हुआ है। लाभार्थी ने कहा कि लोकपाल के आदेशों के खिलाफ वह अपील दायर कर रहे हैं और न्यायालय में अपने पक्ष को मजबूती से रखेंगे।