छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित कोपरा जलाशय को रामसर साइट घोषित किए जाने के बाद अब यहां मछली मारने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर मछलीपालन विभाग ने इस आशय का आदेश जारी किया है। यह कदम जलाशय की पारिस्थितिकीय महत्ता को बनाए रखने और यहां आने वाले देशी-विदेशी पक्षियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हाल ही में राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्रीय सरकार द्वारा बिलासपुर शहर के निकट स्थित कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया है। रामसर साइटें आर्द्रभूमि (wetlands) के संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती हैं। कोपरा जलाशय बड़ी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण बसेरा है। विशेष रूप से शीतकाल के दौरान, यह जलाशय पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक लुभावना दृश्य प्रस्तुत करता है।
जलाशय की पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता और पक्षियों के आवास को संरक्षित करने के लिए, मछलीपालन विभाग ने स्थानीय समुदायों को इस संबंध में सूचित कर दिया है। विभाग ने आसपास के गांवों जैसे सैदा, बेलमुंडी, कोपरा, सकरा, बूटेना, अमसेना, बहुतराई, पाड़ और सरसेनी के सरपंचों को भी इस आदेश से अवगत कराया है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में मछली मारने की मनाही के बारे में मुनादी कराने और किसी भी उल्लंघन की सूचना तुरंत विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं।
मछलीपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति कोपरा जलाशय में मछली मारते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह प्रतिबंध न केवल जलाशय के पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि पक्षियों को निर्बाध रूप से अपना जीवनयापन करने का अवसर मिले।