बिलासपुर में आज अशूरा पर याद की जाएगी इमाम हुसैन की शहादत
मुस्लिम समुदाय करेगा रोजा, करबला के शहीदों को दी जाएगी श्रद्धांजलि
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुस्लिम समुदाय आज मोहर्रम की 10वीं तारीख यानी अशूरा का दिन शोक और श्रद्धा के साथ मनाएगा। इस अवसर पर समुदाय के लोग करबला में शहीद हुए इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कुर्बानी को याद करेंगे और विशेष इबादत और दुआएं करेंगे।
जिला मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रधान नसीम मोहम्मद ने बताया कि करीब 1400 वर्ष पूर्व करबला के मैदान में पैगम्बर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन ने हक, इंसाफ और सच्चाई की रक्षा के लिए अपने परिवार और साथियों सहित शहादत दी थी। उन्होंने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने से इन्कार कर दिया था। करबला की घटना इस्लामी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है। करबला में इमाम हुसैन और उनके साथियों को घेरकर उन पर अत्याचार किए गए, लेकिन उन्होंने सत्य और न्याय के मार्ग से समझौता नहीं किया। उनकी शहादत आज भी मानवता, त्याग और बलिदान का संदेश देती है। अशूरा के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखकर इबादत करते हैं और अपने पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दुआ मांगते हैं। शिया समुदाय के लोग विभिन्न स्थानों पर ताजिया जुलूस निकालकर करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और गम का इजहार करते हैं। नसीम मोहम्मद ने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी पूरी दुनिया के लिए सत्य, न्याय और मानव मूल्यों की रक्षा का संदेश है, जिसे आज भी श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।