गोशालाओं की आर्थिक हालत खराब, लावारिस गोवंश को रखने की स्थिति में नहीं
संचालक बोले, अनुदान बढ़े तो एक भी गोवंश सड़कों पर नहीं रहेगा
जिले की सड़कों पर घूम रहा एक हजार लावारिश गोवंश
प्रकाश ठाकुर
बिलासपुर। जिले में गोशालाओं को दो माह से सरकारी अनुदान नहीं मिला है, जिससे संचालकों की आर्थिक हालत खराब हो रही है। हालात यह कि अब चारे के लिए इंतजाम के लिए उधार तक लेना पड़ रहा है। इसके अलावा गोशालाओं के कर्मचारी दान लेने के लिए गली-गली घूम रहे हैंं।
जिले में 14 गोशालाओं को सरकारी अनुदान दिया जाता है। इन गोशालाओं में वर्तमान में करीब 1400 गोवंश रखा गया है। प्रति गोवंश 700 रुपये अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान भी छह माह से बड़े गोवंश को ही दिया जाता है। छोटे बछड़ों और बछड़ियों और दूध देने वाली गाय पर कोई अनुदान नहीं जाता है। गोशाला संचालकों के अनुसार मई के बाद कोई अनुदान प्राप्त नहीं हुआ है। अब अगस्त का शुरूआती हफ्ता भी खत्म हो गया है। यदि इसी तरह आगे भी अनुदान समय पर नहीं मिला तो आर्थिक स्थिति और खराब होती जाएगी। अब हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर घूम रहे नए गोवंश को गोशाला नहीं लाया जा सकता है। बिलासपुर शहर में चल रही गोशाला में 153 से गोवंश हैं। गोशाला को प्रति माह करीब एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है, लेकिन कुल मासिक खर्च साढ़े चार लाख रुपये तक पहुंच जाता है। गोशाला दूध बेचकर करीब एक लाख रुपये अर्जित करती है, बाकी की रकम दानदाताओं से जुटाई जाती है। अब जब सरकार की ओर से दो माह से बकाया अनुदान नहीं मिला है तो व्यवस्थाएं लड़खड़ाने लगी हैं। इस गोशाला के संचालक अशोक कुमार ने बताया कि गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन संसाधन नहीं बढ़े। दो माह से अनुदान नहीं मिला है तो लोगों से उधार भी लेना पड़ा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार यदि प्रति गोवंश दो हजार रुपये अनुदान दे तो एक भी गोवंश सड़क पर नहीं दिखेगा। गोशाला संचालक पूरा ध्यान सड़कों पर घूम रहे गोवंश पर ही देंगे। दुधारू गोवंश को किसी गरीब परिवार को दिया जा सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की अनुदान बढ़ाया जाए और समय पर दिया जाए।
उधर, दधोल में चल रही गोशाला का भी यही हाल है। उसके संचालक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। हालात यह है कि गोशाला के कर्मचारी अब दान के लिए पर्चियां लेकर गली-गली घूमने का मजबूर हैं। गोशाला के संचालक राम चंद बरूर ने बताया कि मई के बाद कोई अनुदान नहीं मिला है। दानी सज्जनों और गोदान से प्राप्त होने वाली राशि से चारे का इंतजाम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोशाला में 150 गोवंश है। करीब 80 हजार रुपये प्रतिमाह दान मिलता है। जबकि गोशाला का खर्च करीब तीन लाख रुपये प्रतिमाह है। बता दें कि जिले की सड़कों पर लगातार गोवंश की संख्या बड़ रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार सड़कों पर करीब एक हजार गोवंश वारिस घूम रहा है। वहीं, सरकार ने अगस्त से अनुदान को 700 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये करने की घोषणा की है, लेकिन वह भी घोषणा तक सीमित है। संवाद
कोट
गोशालाओं को सरकारी अनुदान समय पर दिया जाता है। जो भी अनुदान बकाया रहा है, उसे भी जल्द जारी कर दिया जाएगा। सरकार गोवंश के उत्थान के लगातार प्रयास कर रही है।
विनोद कुंदी, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग बिलासपुर