अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों की पहचान अब पहले से अधिक सटीक और आधुनिक तकनीक से की जा सकेगी। इसके लिए एम्स के पैथोलॉजी एवं लैब मेडिसिन विभाग में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
एम्स में कैंसर की पहचान में उपयोग होने वाली इम्युनोहिस्टोकैमिस्ट्री तकनीक को और मजबूत किया जा रहा है। विभाग में 24 नए आईएचसी एंटीबॉडी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इनमें एमएलएच-1, पीएमएस-2, गाटा-3, हेप-पार-1, आईडीएच-1 और एसओएक्स-10 जैसे आधुनिक एंटीबॉडी शामिल हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ये एंटीबॉडी ट्यूमर की सूक्ष्म स्तर पर जांच करने में मदद करते हैं। इनके माध्यम से कैंसर के प्रकार, प्रकृति और शरीर में उसके फैलाव की स्थिति का सटीक पता लगाया जा सकता है। इससे बायोप्सी जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में भी सुधार होगा।
नई एंटीबॉडी के शामिल होने से स्तन, लीवर कैंसर, त्वचा से संबंधित ट्यूमर और अन्य जटिल कैंसर के प्रकारों की पहचान अधिक सटीकता से की जा सकेगी और उपचार प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बन सकेगी। इन अत्याधुनिक जांच सुविधाओं का लाभ केवल पैथोलॉजी विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ऑन्कोलॉजी (कैंसर विभाग), गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग में उपचार ले रहे मरीजों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
बाहरी लैब और अन्य राज्यों पर निर्भरता होगी कम
वर्तमान में कई विशेष जांच के लिए मरीजों को निजी प्रयोगशालाओं या अन्य राज्यों के बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करना पड़ता है। इससे मरीजों को अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ जांच रिपोर्ट आने में देरी का सामना करना पड़ता है। एम्स बिलासपुर में इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से अब अधिकांश जटिल जांच संस्थान के भीतर ही की जा सकेंगी। इससे मरीजों का समय और धन दोनों की बचत होगी।