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AIIMS Bilaspur: आयुष्मान के 55, हिमकेयर के 29 करोड़ नहीं मिले, एम्स बिलासपुर में प्रभावित होने लगीं सेवाएं

Wed, 22 Apr 2026 09:16 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

एम्स बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं प्रभावित हो रही हैं। वजह है राज्य सरकार से आयुष्मान के 55 और हिमकेयर के 29 करोड़ रुपये न मिल पाना। पढ़ें पूरी खबर...
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एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एम्स) को राज्य सरकार से आयुष्मान के 55 और हिमकेयर के 29 करोड़ रुपये न मिलने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने लगा है। खासकर, बड़ी सर्जरी प्रभावित होना शुरू हो गई हैं। प्रबंधन बार-बार सरकार को भुगतान के लिए आग्रह कर रहा है, लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला है। इससे योजना के लाभार्थियों को मुश्किलें पेश आ रही हैं। अगर समय पर पैसा नहीं मिलता है तो इससे सेवाएं ठप हो सकती हैं।

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जानकारी के अनुसार, हिप और घुटना रिप्लेसमेंट जैसी सर्जरी, जिनमें महंगे इम्प्लांट और विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है, अब नियमित रूप से नहीं हो पा रहीं। कई मामलों में मरीजों को जांच और परामर्श के बाद सर्जरी के लिए इंतजार करने को कहा जा रहा है। इन सर्जरी का खर्च सामान्य तौर पर हिम केयर और आयुष्मान योजना के तहत कवर होता है, लेकिन उपकरणों की सीमित उपलब्धता के कारण इनकी गति धीमी पड़ गई है। दूसरी ओर, सामान्य और छोटी सर्जरी जिनमें कम लागत और सीमित उपकरणों की आवश्यकता होती है, अभी जारी हैं। आपातकालीन ऑपरेशन किए जा रहे हैं।

यही कारण है कि अस्पताल की सेवाएं पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं। प्रबंधन जुगाड़ से कभी एक तो कभी दूसरे वेंडर से सामान की आपूर्ति करवा रहा है। योजनाओं के पैसे का भुगतान न होने से मौजूदा हालात में व्यवस्था पूरी तरह नहीं टूटी है। कुछ वेंडर अभी भी सप्लाई दे रहे हैं। उपलब्ध संसाधनों के आधार पर काम चलाया जा रहा है। लेकिन स्थिति सामान्य नहीं है। सिस्टम किसी तरह चल रहा है, रुका नहीं है, पर लंबित भुगतान का अमाउंट बहुत बड़ा हो चुका है, जिससे पूरे ढांचे पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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लंबित भुगतान न होने से कई वेंडरों ने सप्लाई कर दी कम
लंबित भुगतान न मिलने के कारण कई वेंडरों ने सप्लाई कम कर दी है। खासकर वे इम्प्लांट और उपकरण, जो बड़ी सर्जरी के लिए जरूरी होते हैं, उनकी उपलब्धता प्रभावित हुई है। कुछ वेंडर अभी सहयोग कर रहे हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहना मुश्किल माना जा रहा है। इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर कार्ड धारकों पर पड़ रहा है। बड़ी सर्जरी टलने से मरीजों का दर्द और परेशानी बढ़ रही है। निजी अस्पतालों में इलाज कराना महंगा विकल्प है।

कई मरीज अनिश्चितता के बीच इंतजार करने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को संभालने के लिए लंबित भुगतान का तत्काल निपटान, वेंडरों का विश्वास बहाल करना, उपकरणों और दवाओं की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है। फिलहाल एम्स बिलासपुर में इलाज जारी है, लेकिन जिस तरह बड़ी सर्जरी प्रभावित होनी शुरू हुई है और भुगतान का बोझ बढ़ता जा रहा है। उससे साफ है कि यह व्यवस्था ज्यादा समय तक इसी तरह संभाल पाना मुश्किल हो सकता है।
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