जानकारी के अनुसार, हिप और घुटना रिप्लेसमेंट जैसी सर्जरी, जिनमें महंगे इम्प्लांट और विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है, अब नियमित रूप से नहीं हो पा रहीं। कई मामलों में मरीजों को जांच और परामर्श के बाद सर्जरी के लिए इंतजार करने को कहा जा रहा है। इन सर्जरी का खर्च सामान्य तौर पर हिम केयर और आयुष्मान योजना के तहत कवर होता है, लेकिन उपकरणों की सीमित उपलब्धता के कारण इनकी गति धीमी पड़ गई है। दूसरी ओर, सामान्य और छोटी सर्जरी जिनमें कम लागत और सीमित उपकरणों की आवश्यकता होती है, अभी जारी हैं। आपातकालीन ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
यही कारण है कि अस्पताल की सेवाएं पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं। प्रबंधन जुगाड़ से कभी एक तो कभी दूसरे वेंडर से सामान की आपूर्ति करवा रहा है। योजनाओं के पैसे का भुगतान न होने से मौजूदा हालात में व्यवस्था पूरी तरह नहीं टूटी है। कुछ वेंडर अभी भी सप्लाई दे रहे हैं। उपलब्ध संसाधनों के आधार पर काम चलाया जा रहा है। लेकिन स्थिति सामान्य नहीं है। सिस्टम किसी तरह चल रहा है, रुका नहीं है, पर लंबित भुगतान का अमाउंट बहुत बड़ा हो चुका है, जिससे पूरे ढांचे पर दबाव बढ़ता जा रहा है।