स्वारघाट की दस हजार की आबादी के लिए वर्ष 2010 में पौने चार करोड़ की कुटेहला उठाऊ पेयजल योजना की आधारशिला रखी गई थी। मगर सरकार तंत्र की लापरवाही का आलम यह है कि छह वर्षों के बाद ही करोड़ों की राशि खर्च होने पर भी यहां की जनता पानी के लिए भटक रही है। टैंडर की शर्तों के मुताबिक एक वर्ष में योजना का काम पूरा होना था।
मगर छह वर्षों के बाद ही योजना अधर में लटकी हुई है। इससे स्थानीय लोग में रोष व्याप्त है। प्रदेश सरकार ने सरकार ने तनबौल, टाली, जकातखाना और कुटैहला उठाऊ पेयजल योजना के लिए 3.83 करोड़ मंजूर किए थे। 22 मई 2010 को तत्कालीन सीएम प्रेम कुमार धूमल ने इस योजना का शिलान्यास किया था।
17 अगस्त को टेंडर हुआ, जिसमें कार्य को एक साल में पूरा करने की शर्त के साथ ठेकेदार को काम आवंटित किया गया। मगर एक साल तो दूर की बात है छह सालों में भी योजना का काम पूरा नहीं हो पाया है।
इसका परिणाम यह है कि आज भी क्षेत्र के 10 हजार से अधिक लोग पानी की समस्या को झेलने को मजबूर हैं। वहीं विभाग की कार्यप्रणाली से गुस्साए ग्रामीणों ने योजना को लेकर आंदोलन का रास्ता इख्तियार करने का फैसला लिया है।
पेयजल योजना से तनबौल, टाली, जकातखाना और कुटैहला उठाऊ पेयजल योजना से स्वारघाट क्षेत्र की तीन पंचायतों तनबौल, टाली, जकातखाना और कुटैहला की करीब 10 हजार से अधिक आबादी को पेयजल सुविधा का लाभ मिलना था।
मगर 6 साल बाद भी उक्त योजना का काम सिरे नहीं चढ़ पाया है। आईपीएच विभाग ने टेंडर के माध्यम से 17 अगस्त 2011 को ठेकेदार को टेंडर अवार्ड करके पेयजल योजना को एक वर्ष के भीतर कार्य पूरा करने का समय दिया था। मगर ऐसा हो नहीं पाया।
ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही का जिम्मेवार कौन है विभाग या फिर ठेकेदार? स्वारघाट क्षेत्र के समाजसेवक भूपेंद्र सिंह ठाकुर, पूर्व उपप्रधान रूपलाल शर्मा, कै. चौधरी राम ठाकुर, पुनीत शर्मा, कृष्णलाल चंदेल, कल्पना शर्मा, चेतराम, प्रेमलाल, मनोज, रिखीराम, राम कृष्ण और सुनील कुमार ने बताया कि विभाग की लापरवाही से क्षेत्र की जनता पानी के पीने के लिए भी तरस रही है।
आईपीएच मंडल अधिशाषी अभियंता जिला बिलासपुर एसके पटियाल ने कहा कि उपरोक्त पेयजल योजना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब पेयजल योजना की टेस्टिंग की जा रही है। शीघ्र ही योजना जनता को समर्पित कर दी जाएगी।