बिलासपुर। जिला के बिलासपुर और घुमारवीं अस्पताल के कुल एक दर्जन डॉक्टर एसआर (सीनियर रेजिडेंट) ट्रेनिंग पर चले गए हैं जबकि कुछ पद खाली हैं।
इन दोनों अस्पतालों में ही मरीजों को सर्जन की सुविधा नहीं मिल रही है। जिस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों और दूसरे जिला की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं जिला अस्पताल बिलासपुर में एमडी का पद करीब एक साल से खाली चल रहा है। लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। जिला की करीब चार लाख आबादी इन दोनों अस्पतालों पर निर्भर है। लोगों की संख्या को देखते हुए जिला के इन अस्पतालों में सभी डॉक्टरों की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन दोनों ही अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल बिलासपुर में रोजाना करीब 700 मरीज ईलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं सर्जरी ओपीडी की बात की जाए तो एक माह में औसतन करीब 30 से 35 मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। लेकिन अब जिला अस्पताल में कुछ माह से सर्जन का पद खाली है। जिस कारण मरीजों को अब ऑपरेशन करवाने के लिए निजी अस्पतालों और दूसरे जिलों का रुख करना पड़ रहा है।
वहीं सर्जन का पद घुमारवीं अस्पताल में भी खाली है। अगर एमडी की बात की जाए तो बिलासपुर अस्पताल में एमडी का पद भी पिछले एक साल से खाली है। जिस कारण लोग एम्स बिलासपुर में एमडी के पास पहुंच रहे हैं। लेकिन एम्स बिलासपुर में भी ओपीडी ज्यादा होने के कारण लोगों को स्वास्थ्य जांच के लिए 10 से 15 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है।
घुमारवीं अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 10 पद हैं। जिसमें चार विशेषज्ञ चिकित्सक एसआर ट्रेनिंग के लिए चले गए हैं। वहीं उसके बाद इन पदों पर अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई है। जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। गरीब लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों की भारी भरकम फीस उनकी परेशानियों का और बढ़ा रही है।
एमएस बिलासपुर डॉक्टर संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि बिलासपुर अस्पताल से छह डॉक्टर एसआर ट्रेनिंग के लिए गए हैं। वहीं सर्जन और एमडी का पद खाली है। खाली पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है, जल्द ही इन पदों का भरा जाएगा। लेकिन सर्जन व एमडी को छोड़कर अन्य डॉक्टरों की सेवाएं लोगों को मिल रही हैं।