स्क्रब टायफस से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में जनवरी से लेकर अभी तक स्क्रब टायफस के 85 मामले आए हैं। स्क्रब टायफस से बचाव के लिए जागरूक होना आवश्यक है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने दी।
उन्होंने बताया कि स्क्रब टायफस बरसात के मौसम में झाड़ियों और घास वाले क्षेत्र या खेतों में रहने वाले चूहों के शरीर में पाए जाने वाले पिस्सू से फैलने वाली बीमारी है। यह बीमारी पिस्सू के खून चूसने से होती है, जो काटने पर लार छोड़ देते हैं। इससे रिकेट्सिया नाम का जीवाणु व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इससे रोगी की हालत बिगड़ जाती है। जब यह संक्रमित माइट ( पिस्सू) के काटने से फैलता है तो त्वचा पर काले रंग की पपड़ी उतरने लग जाती है।
स्क्रब टायफस में बुखार 104 से 105 डिग्री तक जा सकता है। इस बुखार को लोग जोड़-तोड़ बुखार भी कहते हैं। जोड़ों में दर्द के साथ बुखार, शरीर में एंठन, जकड़न, शरीर दर्द, पेट दर्द, कमजोरी और शरीर टूटा हुआ लगता है।
ऐसे करें बचाव
इससे बचाव के लिए शरीर की सफाई का ध्यान रखना चाहिए। घर के आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखें। घर के चारों ओर खरपतवार नहीं उगने दें। घर के अंदर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। खेतों और झाड़ियों 0में काम करते समय शरीर को पूरा ढक कर रखें। खेतों से आने पर गर्म पानी से नहाएं और तौलिया से शरीर को रगड़कर अच्छी तरह साफ करें। स्क्रब टायफस का इलाज बहुत आसान है। शीघ्र डॉक्टर को दिखाना चाहिए। बुखार कैसा भी हो, नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डॉक्टर का परामर्श अति आवश्यक है।