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ऑडिट से खुलासा, दो सौ लोगों के नाम लोन लेकर सचिव डकार गया करोड़ों

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बरठीं(बिलासपुर)। दी तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा में सचिव ने लोगों के नाम पर लाखों रुपये डकार लिए। सरकार की ओर से मिली लोगों को राहत का पैसा भी सचिव अपने आप हजम कर गया है। जिसका खुलासा सभा में चल रहे ऑडिट से हुआ है। वहीं ठगी का शिकार हुए लोगों ने सचिव के खिलाफ पुलिस में भी एफआईआर दर्ज करवाने का मन बना लिया है। यही नहीं सचिव ने नियमों को ताक पर रख कर दूसरे राज्यों में भी लोन दे दिया है। वहीं करीब दो सौ लोगों के नाम भी ऋण लेकर सचिव हजम कर चुका है।
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जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के उलट सोसाइटी ने कार्य शुरू किया। इस कारण लगभग सौ करोड़ से ज्यादा जमा पूंजी वाली सहकारी सभा का खजाना गलत ढंग से ऋण देने के कारण खाली हो चुका है। सहकारी सभा के कारिंदे सालों से सभा को हड़पने में लगे हैं और किसी को कानों कान खबर तक नहीं होने दी। खुलासा तब हुआ जब सहकारी सभा के एक सदस्य द्वारा आरटीआई ली गई। जिसमें पाया कि सभा में लगभग 84 लाख का लोन सभा क्षेत्र में आने वाले सदस्यों ने लिया था और 2008 में 82 लाख सरकार व विभाग द्वारा माफ कर दिया गया था। लेकिन तत्कालीन सभा सचिव व सभा द्वारा इसकी किसी भी व्यक्ति को भनक नहीं लगने दी और 82 लाख भी हड़प लिया। इसका लाभ किसी भी ऋणदाता को नहीं दिया गया।
माफ हुए ऋण को भी लोगों द्वारा सहकारी सभा में लिया गया। सरकार का नियंत्रण न होने के कारण ऐसा ही गोरखधंधा प्रदेश की सभी सहकारी सभाओं में चल रहा है। निदेशालय सहकारी विभाग द्वारा जारी पत्र संख्या 5.60/91.कॉप सी एंड एम-।। दिनांक 22 सितंबर 2012 के तहत बैंकों व सहकारी सभाओं को निर्देशित किया है कि बैंक सहकारी सभाओं को पांच प्रतिशत दर पर ऋण उपलब्ध करवाएगा। सहकारी सभाएं अपने क्षेत्र के ऋणदाताओं को सात प्रतिशत पर ऋण उपलब्ध करवाएंगी। जिसमें सहकारी सभा दो प्रतिशत का लाभांश ऋणदाता से कमीशन के तौर पर अपने पास रख सकती है और पांच प्रतिशत बैंक को वापस करेगी।
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लेकिन सहकारी सभाएं इसके विपरीत आठ से बारह प्रतिशत ब्याज ऋणदाताओं से वसूल कर मोटी कमाई कर रही हैं। सहकारी सभाओं द्वारा बैंकिंग का कार्य करने पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
सहकारी सभाओं को निर्देशित किया गया है कि वह अपने स्थान से चार किमी के दायरे में ही लेन देन कर सकती है। लेकिन सहकारी सभाओं ने लक्ष्मण रेखा को पार कर दूसरे जिला में ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी लेन देन प्रक्रिया शुरू कर रखी है।
जिसका खामियाजा सहकारी सभा तलाई को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी नियंत्रण न होने के कारण यह सभाएं अपना ऑडिट सेवा निवृत अधिकारियों से करवाती आ रही है लेकिन प्रतिवर्ष हो रहे ऑडिट में भी दस वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे का परदाफ ास क्यों नहीं किया गया? जिस कारण ऑडिट अधिकारियों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
उधर, सहायक पंजीयक अधिकारी रमेश शर्मा ने बताया कि अपना नाम चमकाने के लिए कुछ सहकारी सभाओं ने नियमों को ताक पर रख कर लोनिंग की है। जिसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गडबड़ी करने वालों को कतई बख्क्षा नहीं जाएगा।
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