जुखाला(बिलासपुर)। जिले में आम की बंपर फसल होने के बाद भी बागवानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। हालांकि सरकार ने आम की फसल का समर्थन मूल्य 6 और सात रुपये तक किया है लेकिन जिला में आम की खरीद के लिए सरकार की ओर से कोई खरीद केंद्र नहीं है। इस कारण बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालत ऐसी है की बागवानों की आम की फसल बागीचों में ही सड़ती जा रही है।
बताया जा रहा है कि आम की खरीद का जिम्मा हिमफेड व एचपीएमसी को दिया है। इन सरकारी एजेंसियों ने आम खरीदना शुरू नहीं किया है। आम खरीद में देरी के कारण बागवानों का आम बगीचों में सड़ रहा है। बिलासपुर में इस बार आम की 4500 मीट्रिक टन पैदावार का अनुमान है।
सरकार ने आम का समर्थन मूल्य तय किया है उसमें देसी आम 6 रुपये किलो और कलमी आम का मूल्य 7 रुपये किलो तय किया है लेकिन समय पर खरीद केंद्र न खोलने के कारण बागबानों का देसी आम तो बगीचों में ही सड़ गया है जो दूसरा कलमी आम है उसको बागबानों को सस्ते दामों पर बेचना पड़ रहा है।
जिले में 8100 हेक्टेयर भूमि पर आम की खेती की जाती है। आम की खरीद के लिए बागबानी विभाग ने जुखाला, निहाल, निहारी, कलोल, कंदरौर व भड़ोली कलां में आम खरीद केंद्र खोलने की अनुमति दी है तथा इन केंद्रों में आम खरीद का जिम्मा हिमफेड व एचपीएमसी को दिया है लेकिन समय पर आम खरीद केंद्र न खुलने के कारण बागवानों को नुकसान हुआ है।
इधर, इस संबंध में निदेशक बागवानी एमएल धीमान ने बताया कि विभाग की तरफ से आम खरीद का जिम्मा हिमफेड व एचपीएमसी को दिया गया है तथा खरीद केंद्रों की सूची भी दी गई है ताकि तय समर्थन मूल्य पर आम खरीद हो सके।
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