कनेक्टिविटी के मामले में श्री नयना देवी जी विधान सभा क्षेत्र की स्थिति सबसे खराब
गिफ्ट डीड की अड़चन से अटका सड़कों का निर्माण, नहीं पहुंच पाता दमकल विभाग
बढ़ते गैस सिलिंडर, जंगलों की आग और सीमित संसाधन से अग्निशमन तंत्र पर बढ़ता दबाव
शहर के बीच रिहायशी क्षेत्रों में खुली गैस एजेंसी के स्टोर में रखे सिलिंडर दे रहे हादसों को न्योता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की जमीनी हकीकत एक गंभीर चेतावनी दे रही है। जिले के 54 गांव ऐसे हैं जो आज भी सड़क सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं, जिससे आग से जुड़ी घटना, दुर्घटना या किसी अन्य आपदा की स्थिति में इन गांवों तक समय पर राहत पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में जानमाल का नुकसान हो जाता है।
जानकारी के अनुसार इन गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए संबंधित विभागों को प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं और प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है, लेकिन भूमि स्वामियों की ओर से गिफ्ट डीड न दिए जाने के कारण योजनाएं फाइलों में अटकी हुई हैं। नतीजतन आपदा प्रबंधन की सबसे बुनियादी आवश्यकता सड़क अब भी इन गांवों तक नहीं पहुंच पाई है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन 54 गांवों में से सबसे अधिक गांव श्री नयना देवी जी विधानसभा क्षेत्र में स्थित हैं। यह क्षेत्र धार्मिक, पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सड़क से कटे गांवों में आग लगने की स्थिति में फायर टेंडर गांव से कई किलोमीटर दूर ही रह जाता है। उसके बाद कर्मियों को पैदल, पाइप या स्थानीय संसाधनों के सहारे काम करना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आग के फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
आग लगने के पहले 10–15 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस समय फायर ब्रिगेड घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाती, तो नुकसान को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। सड़क के अभाव में पूरा सिस्टम कमजोर पड़ जाता है और नुकसान बढ़ जाता है।
जिले में आग लगने के खतरे की आशंका को बढ़ाने वाला एक बड़ा कारण घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की बढ़ती संख्या भी है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार जिले में घरेलू गैस सिलिंडर बिक्री 56,274 हुई। व्यावसायिक गैस सिलिंडर बिक्री 3,472 रही। भरे हुए घरेलू सिलिंडर की संख्या 4,628, खाली घरेलू सिलिंडर 1,799 है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में एक ही घर या दुकान में दो-तीन सिलिंडरों का भंडारण, वह भी बिना सुरक्षा मानकों के, आगजनी की घटनाओं को और खतरनाक बना रहा है।
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बिजली की वायरिंग, सिलिंडरों का गलत भंडारण भी कारण
संकरी गलियां, लकड़ी के मकान, बिजली की अव्यवस्थित वायरिंग और गैस सिलिंडरों का गलत भंडारण ये सभी मिलकर आग को छोटी चिंगारी से बड़ी तबाही में बदल देते हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को ध्यान रखना चाहिए कि जब भी सिलिंडर स्टोर करने हो, उन्हें रसोईघर में स्टोर न करें। रसोई में एक ही सिलिंडर रखें। सिलिंडर सभी इंश्योरड होते हैं। जागरूकता के साथ काम करें, ताकि ऐसी किसी घटना का सामना न करना पड़े।
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सीमित संसाधनों में भी अग्निशमन विभाग की मुस्तैदी
तमाम चुनौतियों के बावजूद बिलासपुर का अग्निशमन विभाग सीमित संसाधनों के साथ लगातार मोर्चा संभाले हुए है। जिले में फायर स्टेशन एक, सब फायर स्टेशन एक, फायर चौकी दो हैं। इनमें कुल 46 कर्मी हैं। झंडूता, घुमारवीं और श्री नयना देवी जी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी सीमित स्टाफ और वाहनों के बावजूद 24×7 सेवाएं दी जा रही हैं।
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घटनाएं और आंकड़े : पांच साल में करोड़ों की संपत्ति सुरक्षित
दमकल विभाग ने बीते वर्षों में न केवल आग पर काबू पाया, बल्कि करोड़ों रुपये की संपत्ति और सैकड़ों जानें भी बचाईं। जंगलों की आग सबसे बड़ी चुनौती रही। 2024-25 में जंगल की आग की 73 घटनाएं, नुकसान 39.38 लाख रुपये का ,81.63 करोड़ रुपये की संपत्ति बचाई। 2025-26 में अब तक जंगल की आग की 13 घटनाएं, नुकसान 9 लाख, बचाया 13 करोड़। 2025-26 में अब तक मकानों में आग की 10 घटनाएं हुई, जिसमें 2.20 करोड़ रुपये की संपत्ति को बचाया गया।
आग की घटनाओं में 33 लोगों की जान बचाई गई। 2025-26 में इंडस्ट्रियल फायर की पांच कॉल्स हुई। इनमें 6.52 करोड़ रुपये की संपत्ति सुरक्षित की गई।
कोट
आग की घटनाओं से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सड़क से कटे गांवों को प्राथमिकता सूची में शामिल किया जाए। गिफ्ट डीड की प्रक्रिया को सरल या वैकल्पिक नीति से हल किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में फायर हाइड्रेंट, पानी के स्थायी स्रोत और स्थानीय वालंटियर फायर टीमें बनाई जाएं। गैस सिलिंडर भंडारण और उपयोग पर सख्त जागरूकता और निरीक्षण अभियान चलाया जाए। जब तक सड़क तक पहुंच और रोकथाम पर एक साथ काम नहीं होगा, तब तक अग्निशमन विभाग चाहे जितना सक्षम हो, जोखिम बना रहेगा। - त्रिलोक जमवाल, सदर विधायक
कोट
गैस एजेंसी के कार्यालय और स्टोर के लिए केंद्र सरकार के पेशो गाइडलाइन के तहत मानक तय हैं। एजेंसी कार्यालय के बाहर 100 किलो की मात्रा से ज्यादा सिलिंडर नहीं रख सकते हैं। अगर मानकों का उल्लंघन होता है तो कार्रवाई तय की जाती है। - ब्रिजेंद्र पठानिया, जिला खाद्य नियंत्रक