अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। सन 1960 से बिलासपुर में खुले पुस्तकालय में अभी तक बिलासपुर के इतिहास की एक भी किताब नहीं है। अगर विद्यार्थियों को बिलासपुर के इतिहास के बारे में कुछ जानना हो तो उन्हें इंटरनेट का सहारा लेना पड़ता है। विद्यार्थियों ने इस बात पर कई बार रोष भी प्रकट किया है कि उन्हें बिलासपुर इतिहास की किताबें मुहैया करवाई जाएं लेकिन कई दशक बीत गए यहां पर बिलासपुर इतिहास की किताबों को पढ़ने के लिए विद्यार्थी तरस रहे हैं।
बता दें कि बिलासपुर लाइब्रेरी में सरदार वल्लभ भाई पटेल, पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर रै-जे-यूर द्वारा ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के संक्षिप्त इतिहास के साथ ही गदर दिल्ली की डायरी जैसी कई दुर्लभ श्रेणी की किताबें भी पाठकों के लिए उपलब्ध रहती हैं। पाठकों की भाषा ज्ञान के हिसाब से भी यहां पर अंग्रेजी, हिंदी, पहाड़ी, पंजाबी और उर्दू भाषाओं की किताबें भी इस लाइब्रेरी में पाठकों के लिए उनकी मांग के मुताबिक उपलब्ध करवाई जाती है।
वहीं बिलासपुर जिला के पाठकों के लिए हिमाचल लेखकों सुदर्शन वशिष्ठ, खुशी राम शास्त्री, गौतम व्यथित, नरोत्तम दत्त शास्त्री की व्यास की धरा, कांगड़े दियां लोक कथां, गास्सें हत्थ पुजाणे लोगों की मांग पर मंगवाए जाते हैं लेकिन हैरान करने वाली बात तब पैदा होती है जब यहां के लोग व विद्यार्थी बिलासपुर इतिहास की किताब मांगते हैं तो विद्यार्थी को निराशा हाथ लगती है।
उधर,बिलासपुर कॉलेज प्राचार्या बृजबाला सांख्यान ने बताया कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। बिलासपुर इतिहास की किताब लाइब्रेरी में होना आवश्यक है। अगर नहीं है तो कारणों का पता किया जाएगा।