बिलासपुर में पंचायती राज की चुनावी प्रक्रिया में बड़ी चूक
क्रम संख्या 58001 से 58050 तक के बैलेट पेपर रहस्यमयी ढंग से गुम
खंड विकास अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में पंचायत चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता को धता बताते हुए एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। विकास खंड बिलासपुर के तहत जंगल सुंगल वार्ड (प्रधान पद) के 50 बैलेट पेपर रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। इस बड़ी चूक के उजागर होते ही प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है। जिला व ब्लॉक प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित सहायक रिटर्निंग अधिकारी बामटा को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। वहीं, खंड विकास अधिकारी की शिकायत पर थाना सदर बिलासपुर में आपराधिक मामला दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार, विकास खंड कार्यालय बिलासपुर के अंतर्गत आंबेडकर भवन में इन दिनों पंचायत चुनाव से जुड़े मतपत्रों के लेखन और रिकॉर्ड संधारण का कार्य चल रहा था। इसी दौरान जब दस्तावेजों का बारीकी से मिलान और रिकॉर्ड की स्क्रूटनी की गई, तो पाया गया कि जंगल सुंगल वार्ड (प्रधान पद) के लिए जारी किए गए 50 बैलेट पेपर रिकॉर्ड से गायब हैं। विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गुम मतपत्र क्रम संख्या 58001 से 58050 तक के थे, जिन्हें एआरओ बामटा को आवंटित किया गया था। लेखन कार्य संपन्न होने के बाद जब रिकॉर्ड वापस लिया गया, तो संबंधित अधिकारी इन मतपत्रों का हिसाब या इन्हें प्रस्तुत करने में पूरी तरह असमर्थ रहे। मामले की संवेदनशीलता और चुनावी पारदर्शिता पर उठते सवालों को देखते हुए खंड विकास अधिकारी बिलासपुर विजय कुमार ने थाना सदर में लिखित शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस ने यह मामला जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दर्ज किया है। सुरक्षित हैंडओवर प्रक्रिया में नाकाम रहने और तय जिम्मेदारी में गंभीर लापरवाही बरतने पर प्रशासन ने संबंधित एआरओ बामटा को तुरंत कार्यमुक्त कर दिया है। सुचारू चुनावी प्रक्रिया के लिए उनके स्थान पर तत्काल नए एआरओ की नियुक्ति भी कर दी गई है।
इनसेट
सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल
लोकतंत्र के सबसे निचले और महत्वपूर्ण स्तर पंचायती राज के चुनावों में 50 मतपत्रों का इस तरह गायब होना पूरी चुनावी मशीनरी, सुरक्षा तंत्र और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मामला दर्ज होने के बाद सदर पुलिस ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच तेज कर दी है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि मतपत्रों का गायब होना महज अधिकारी की लापरवाही है या मानवीय चूक, अथवा इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।
कोट
संबंधित अधिकारी को जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह उसे ठीक ढंग से पूरा करने में विफल रहे। मतपत्रों की सुरक्षित हैंडिंग-ओवर प्रक्रिया में बड़ी चूक पाई गई है, जिसके चलते उन्हें पद से हटाकर नए एआरओ की तैनाती कर दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
विजय कुमार, खंड विकास अधिकारी, बिलासपुर