बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। निर्माण कार्य के दौरान बिना मंत्रालय के मंजूरी के नौ गांवों का भूमि अधिग्रहण प्लान बदला गया है। इस बदलाव से सड़क की पूरी दिशा ही बदल गई है। हालांकि पहले एनएचएआई और निर्माण कर रही कंपनी प्लान संबंधी सवाल का जवाब देने से बचते रहे। जबकि वन विभाग भी इस मामले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं था। लेकिन विस्थापितों के कोर्ट में जाने की चेतावनी पर भू-अर्जन अधिकारी कार्यालय ने आरटीआई आवेदन के जवाब में प्लान बदले जाने की बात को स्वीकारा है।
इस मामले में संघर्षरत फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने
कहा कि प्लान को बिना मंत्रालय से मंजूरी के ही बदला गया है। इस बात पर वे लगातार आपत्ति जता रहे थे लेकिन विभाग जानकारी देने से बचते रहे। अब जब उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी दी तो भू अर्जन अधिकारी कार्यालय ने लिखित में जवाब और मानचित्र देकर प्लान बदले जाने की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की ओर से कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के लिए जो जमीन और स्थान तय किया गया था सड़क निर्माण उस पर न कर दूसरे स्थान से किया गया। समिति के ही एक आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई गाइडलाइन में बताया जा चुका है कि प्लान बदलने के लिए मंत्रालय की मंजूरी अनिवार्य होती है। इसी को देखते हुए पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने राष्ट्रपति को शिकायत की थी। इसके बाद परियोजना निदेशक ने इस संबंध में कहा था कि भूमि अधिग्रहण प्लान में कोई बदलाव नहीं है। वहीं, जिला वन अधिकारी भी इस मामले में कुछ बोलने से बचते रहे। उधर, वन मंत्री ने भी इस संबंध में पूरी रिपोर्ट तलब की। इसके बाद जिला दंडाधिकारी के आदेश पर जिला राजस्व अधिकारी बिलासपुर में इस संबंध में 24-10-2016 को निरीक्षण किया था लेकिन उस दौरान भी भूमि अधिग्रहण मामले में किसी प्रकार के बदलाव की बात को नकारा गया। उधर, भू-अर्जन अधिकारी चेतना खंडवाल का कहना है कि समिति ने फोरलेन प्लान में बदलाव संबंधी जानकारी मांगी थी जो उन्हें लिखित में उपलब्ध करा दी गई है।