अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। एशिया का सब से बड़े मानव निर्मित डैम गोबिंदसागर में पानी का स्तर कम हो गया है जिस कारण आने वाले समय में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी पानी का संकट खड़ा हो सकता है। वहीं मछली उत्पादन पर भी इसका असर पड़ेगा। इस कारण बिलासपुर और ऊना जिला के संबंध रखने वाले मछुआरों को आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस साल पिछले साल की तुलना में जल स्तर करीब 68 फुट नीचे रह गया है।
वहीं गोबिंदसागर में पानी का जल स्तर कम होने से बीबीएमबी की भी चिंता बढ़ गई है क्योंकि पानी का स्तर कम होने से जहां मत्स्य उत्पादन पर असर पड़ेगा, वहीं भाखड़ा मेें बिजली उत्पादन में भी गिरावट आना लाजमी है।
पूरे उत्तरी भारत को बिजली की आपूर्ति करने वाले भाखड़ा डैम का जलस्तर इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा लगभग 68 फुट कम है। अगर ऐसा ही हाल रहा तो आने वाले समय में बिजली उत्पादन भी कम होगा जिसका सीधा असर उत्तर भारत में दिखेगा।
सूत्रों की मानें तो पौंग डैम का भी यही हाल बना हुआ है। ऐसे में यदि पानी की आवक कम रही तो दोनों ही डैमों में पानी का स्तर कम रह सकता है जिससे आने वाले समय में जहां हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में जल संकट गहरा सकता है, वहीं बिजली आपूर्ति की भी कमी बन सकती है।
भाखड़ा और पौंग की सहयोगी सतलुज और ब्यास नदियों के कैचमेंट एरिया में मानसून की बारिश में 11 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। भाखड़ा और पौंग डैम का फिलिंग सीजन जून से सितंबर तक चलता है जिसमें मानसून की वर्षा अहम रहती है।
सूत्रों की मानें तो बीबीएमबी ने हाल ही में जलस्तर को लेकर चंडीगढ़ में एक समीक्षा बैठक भी की है। बीबीएमबी ने भाखड़ा और पौंग डैम से पानी लेने वाले भागीदार राज्यों को मानसून के पानी संचय और अधिकतम उपयोग करने की भी सलाह दी है। मत्स्य विभाग के निदेशक सतपाल मेहता ने बताया की पिछले साल की तुलना में इस वर्ष अभी तक गोबिंदसागर में 68 फुट पानी नीचे है।