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दस साल बाद रामलाल और राजेंद्र गर्ग के सिर सजा जीत का सेहरा

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बिलासपुर। आखिरकार घुमारवीं और श्रीनयनादेवी विस क्षेत्र से दो बड़े योद्धाओं का नाम गुमनामी के अंधकार में गुम होने से बच गया। दोनों नेताओं का शायद यह आखिरी चुनाव होता अगर वह हार जाते। लेकिन दोनों नेताओं ने अपनी जीत पक्की कर अपने आपको गुमनामी से बचा लिया। इसे अब इनके लिए नए युग की शुरुआत भी कह सकते हैं।
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श्रीनयना देवी विधानसभा क्षेत्र से ठाकुर रामलाल पिछले दस सालों से जीत के लिए तरस रहे थे।

हर बार वह एक हजार से लेकर 1500 के मार्जन से अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के प्रत्याशी रणधीर शर्मा से हार रहे थे। हार का मार्जन ज्यादा न होने से उनको हमेशा यह मलाल रहता था कि शायद उन्होंने ज्यादा मेहनत की होती तो वह जीत जाते। लेकिन इस बार उनकी पिछले दस सालों से की जा रही मेहनत रंग लाई और रामलाल ठाकुर ने रणधीर शर्मा को 1042 वोटों से हराकर जीत दर्ज कर ली। जीत की खुशी ठाकुर रामलाल के चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी, जब वह मतगणना केंद्र से बाहर आए। श्रीनयनादेवी सीट पर हमेशा से ही कांटे की टक्कर रही है। दोनों दिग्गजों की लोगों में अच्छी पकड़ है।

इसके अलावा घुुमारवीं विस क्षेत्र में राजेंद्र गर्ग के सिर भी आखिरकार जीत का सेहरा सज ही गया। अगर जीत इतने बड़े मार्जन की हो जिसको तोड़ पाना किसी भी नेता के लिए मुश्किल हो तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। भाजपा के राजेंद्र गर्ग ने कांग्रेस के राजेश धर्माणी को एकतरफा मुकाबले में 10,435 मतों से करारी शिकस्त दी। बिलासपुर जिला की यह सबसे बड़ी जीत है। इस जीत ने यह साबित कर दिया कि राजेंद्र गर्ग की घर-घर जाकर लोगों से मिलने व उनके सुख-दुख में शामिल होने की बात लोगों को पसंद आई। दोनों विस क्षेत्रों में योद्धाओं की जीत उनके लिए नया युग माना जा रहा रहा है।
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