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किसानों को मक्की के नहीं मिल रहे सही दाम

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शाहतलाई (बिलासपुर)। जिला बिलासपुर में किसानों को फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। आढ़तियों-व्यापारियों की लूटखसोट के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं कृषि विभाग भी किसानों के लिए कारगर कदम नहीं उठा रहा है। किसानों के लिए आज दिन तक कोई ठोस नीति नहीं बन पाई।
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जानकारी के अनुसार जिला के 65 हजार से अधिक परिवार आज भी रोजी-रोटी के लिए खेतीबाड़ी पर ही निर्भर हैं। जिला में 65 हजार कृषि परिवार करीब 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि करके अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। जिले में मात्र 10 फीसदी भूमि पर ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। इस कारण किसान केवल मक्की और गेहूं की फसल पर निर्भर हैं। बिलासपुर जिला में 70 हजार मीट्रिक टन से अधिक मक्की की पैदावार होती है। किसानों में रोष है कि सरकार कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध नहीं करवाती। पैदावार की बिक्री के लिए किसानों को आढ़तियों व व्यापारियों की लूटखसोट पर छोड़ दिया जाता है। इससे व्यापारी किसानों की फसल के मनमाने दाम लगाकर दोनों हाथों से लूटते हैं।

किसान राजेंद्र कुमार, सुशील कुमार, सीता राम, सोमदत्त, हरिराम, केवल राम, वीरी सिंह, ओंकार ठाकुर, बलदेव कुमार, चंद्र कुमार सहित कई किसानों का कहना है कि उन्होंने कृषि विभाग से 75 से 80 रुपये प्रति किलो व बाजार से 200 से 225 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मक्की का बीज खरीदकर पैदावार की है। लेकिन, अब व्यापारी व आढ़ती भाव कम होने के नाम पर 10 से 12 रुपये प्रति किलो मक्की खरीद कह रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि बीते साल 14 रुपये मक्की बिकी थी। लेकिन, अब 10 रुपये भाव आंका जा रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार फसल को खरीदने का कोई प्रबंध आज दिन तक नहीं कर पाई है। भंडारण करने का भी कोई प्रबंध नहीं है। किसानों का कहना है कि चुनावों के समय हर पार्टी किसानों की भलाई के लिए उचित कदम उठाने की बात करती है। लेकिन, बाद में किसानों की मूल सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।

उधर, जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. दलीप सिंह पंत ने बताया कि विभाग में किसानों से मक्की की पैदावार खरीदने का कोई प्रावधान नहीं है। केवल आईएफसी ही फसल को खरीदता है उसके अपने पैमाने होते हैं।
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