अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जीएसटी लागू होने के बाद कंस्ट्रक्शन वर्क में पेश आ रही समस्याएं ठेकेदारों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। ठेकेदारों का कहना है कि जीएसटी के बाद ठेकेदारों को सरकारी सीमेंट मिलना मुश्किल हो गया है। इससे विकास कार्य बंद हो गए हैं। ठेकेदारों ने जीएसटी के माध्यम से की जा रही वसूली बंद करने तथा डीसी कैटेगरी के ठेकेदारों को ईपीएफ के दायरे से बाहर करने की भी मांग की है। इन मांगों को लेकर ठेकेदार यूनियन बिलासपुर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष आशीष ढिल्लों व महासचिव हंसराज शर्मा ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद पीडब्ल्यूडी के बजाए खाद्य आपूर्ति विभाग के माध्यम से सीमेंट देने का निर्णय लिया गया है लेकिन इससे ठेकेदारों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। न तो उन्हें पीडब्ल्यूडी से सीमेंट मिल रहा है और न ही खाद्य आपूर्ति विभाग इसकी आपूर्ति कर रहा है। इसका असर विकास कार्यों पर पड़ना स्वाभाविक है। लिहाजा यह समस्या जल्द सुलझाई जाए।
यूनियन के नुमाइंदों ने कहा कि जीएसटी के माध्यम से ठेकेदारों से की जा रही वसूली सरासर गलत है। लिहाजा इसे बंद करके पूर्व में जो व्यवस्था वैट में थी उसे लागू किया जाए। ठेकेदारों की राशि से एक फीसदी लेबर सेस काटा जाता है। इसका कुछ हिस्सा इंश्योरेंस अथवा ठेकेदारों के कल्याण को लेकर अन्य कार्यों पर भी खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि इन मांगों पर गंभीरता से विचार करके उचित कदम उठाए जाएं ताकि ठेकेदारों की समस्या दूर होने के साथ ही विकास कार्यों में भी कोई अड़चन न आए।