बिलासपुर। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिलासपुर को यह पता नहीं है कि घाघस से हमीरपुर तक, नौणी चौक से ब्रह्मपुखर तक सड़क निर्माण का कार्य कौन कर रहा है। इसके अलावा बोर्ड के पास यह सूचना भी नहीं है कि सड़क निर्माण के समय की गई अवैध डंपिंग से आज दिन तक विभिन्न विभागों को कितना नुकसान हुआ है। चौंकाने वाला विषय यह है कि आज दिन तक बोर्ड ने कोई कार्रवाई अवैध डंपिंग और प्रदूषण के अन्य मामलों को लेकर नहीं की। यह जानकारी कार्यालय से प्राप्त आरटीआई की सूचना संख्या (पीसीबी/बीएलपी/ (46) सूचना का अधिकारी अधिनियम 2005/ भाग-7/ 2016-92) में प्रदूषण बोर्ड के एक्सईएन डॉ. आरके नड्डा ने दी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब प्रदूषण बोर्ड को इन महत्वपूर्ण बातों की कोई जानकारी नहीं है तो वह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर कैसे कार्रवाई करेगा।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति द्वारा मांगी गई सूचनाओं के जवाब में प्रदूषण बोर्ड के गैर जिम्मेदारान जवाब सामने आए हैं। समिति ने पूछा था कि सड़क से उठने वाली धूल को नियंत्रण करने के लिए दिन में कितनी बार पानी का छिड़काव करना जरूरी है, जबकि रात के समय भी पानी के छिड़काव का समय उपलब्ध करवाया जाए। इसके जवाब में बोर्ड का कहना है कि इस प्रकार के कोई भी निर्धारित मापदंड के दिशा-निर्देश नहीं हैं। जबकि न ही प्रदूषण बोर्ड के पास ऐसी कोई जानकारी है जिसमें पीने के पानी, नालों, खड्डों, झील आदि को कंपनी ने अवैध डंपिंग से प्रभावित किया है। इसके अलावा नौणी चौक से ब्रह्मपुखर व घाघस से हमीरपुर तक अवैध रूप से फेंकी जा रही मिट्टी से कौन-कौन से विभागों को नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी भी प्रदूषण बोर्ड के पास नहीं है। वहीं बोर्ड को यह तक पता नहीं कि अवैध डंपिंग से होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा। जबकि प्रदूषण बोर्ड मिट्टी को डंप करने की प्रक्रिया के बारे में भी कुछ नहीं जानता कि किन मापदंडों के आधार पर मिट्टी को डंप किया जाता है।
इनसेट....
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान राकेश कुमार, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार, महा सचिव मदन लाल, चिंता देवी, बलदेव, जगत राम, सुभाष, रतन सिंह, भगत राम आदि का कहना है कि प्रदूषण बोर्ड द्वारा दी गई जानकारी कई सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि लोग मिट्टी और धूल से परेशान हैं। पानी की कई स्रोत खराब हो चुके हैं। इसके बाद भी प्रदूषण बोर्ड कहता है उनके पास कोई जानकारी नहीं है।