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Shimla: बागवानी विवि के वीसी, रजिस्ट्रार को जमानती वारंट जारी, कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर कार्रवाई

Thu, 21 May 2026 10:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हाईकोर्ट ने डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) और रजिस्ट्रार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। 
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अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) और रजिस्ट्रार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने पाया कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद न तो विश्वविद्यालय ने फैसले को लागू किया और न ही दोनों जिम्मेदार अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए। अदालत ने यह फैसला विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन न करने और व्यक्तिगत रूप से पेश न होने पर सुनाया है। यह मामला नेक राम बनाम डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी के तहत दायर निष्पादन याचिका से जुड़ा है। अदालत ने 13 मई 2026 को हुई पिछली सुनवाई में विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अगली यदि सुनवाई यानि कि 20 मई से पहले अदालत के फैसले का अनुपालन नहीं किया गया, तो कुलपति और रजिस्ट्रार दोनों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। 

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बिना जमीन का कब्जा लिए ठेका देना फिर काम बंद करना प्रशासनिक चूक

 हाईकोर्ट ने पिंजौर बाईपास से बद्दी-नालागढ़ सड़क को चार लेन बनाने की परियोजना में हो रही अत्यधिक देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना जमीन का कब्जा लिए ठेका जारी करना और फिर काम बीच में ही बंद कर देना एक गंभीर प्रशासनिक चूक है। खंडपीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि कोर्ट के पिछले आदेशों के बावजूद एनएचएआई ने यह साफ नहीं किया कि 469 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में से अब तक ठेकेदार कंपनी को कितना भुगतान किया जा चुका है और किस आधार पर उसे काम छोड़ने की अनुमति दी गई। अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले इन दोनों मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट की पूरी रिपोर्ट और टेंडर प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की जाए। सुनवाई के दौरान एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी कर्नल अजय सिंह. प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद कुमार मौजूद रहे। 
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