हिमाचल में पूर्व भाजपा सरकार की एक और योजना को झटका लगा है। अब धार्मिक पर्यटन से जुड़ा आनंदपुर साहिब-नयनादेवी रोपवे प्रोजेक्ट खटाई में पड़ गया है। नई सरकार इसे बदले हुए रूप में बनाना चाह रही है। मंत्रिमंडल ने सुझाव दिया है कि प्रोजेक्ट पंजाब को जोड़े बिना हिमाचल की सीमा में ही बनना चाहिए।
पूर्व सरकार के समय हिमाचल और पंजाब के बीच हुए एमओयू की समीक्षा के आदेश मुख्य सचिव सुदृप्त राय को दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ेगी। सूत्र कहते हैं कि नयना देवी से पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर ने इस बारे में एक प्रस्ताव सरकार को दिया था, जिस पर कैबिनेट में चर्चा हुई।
26 जुलाई 2012 को एमओयू पर हिमाचल के पूर्व पर्यटन निदेशक डा. अरुण शर्मा और पंजाब पर्यटन विभाग के निदेशक डा. केएस सरा ने हस्ताक्षर किए थे। पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल खुद शिमला आए थे। धूमल और बादल ने तब कहा था कि दोनों धार्मिक स्थलों के जुड़ने से दोनों राज्यों को लाभ होगा।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछले छह महीने के फैसलों की समीक्षा के दायरे में ये एमओयू भी आ गया। अब प्रस्ताव है कि नयनादेवी के पास ही स्थित टोबा नामक स्थान से रोपवे बनाया जाए। शीर्ष अफसर कहते हैं कि रिपोर्ट आने के बाद पंजाब को इस बारे में सूचित किया जाएगा।
ऐसे रोपवे बनाना था दोनों राज्यों ने
एमओयू के मुताबिक आनंदपुर साहिब और नयनादेवी के बीच 3751 मीटर लंबा रज्जू मार्ग बनना था। 275 मीटर पंजाब में और शेष हिमाचल में आना था। प्रोजेक्ट लागत 85 करोड़ थी। दोनों राज्यों की भागीदारी 50, 50 फीसदी थी। इसे तीन साल में पूरा किया जाना था।
नयना देवी आते हैं 70 लाख श्रद्धालु
शक्तिपीठ नयना देवी में हर साल 65 से 70 लाख श्रद्धालु आते हैं। हर साल 10 फीसदी बढ़ोतरी श्रद्धालुओं में दर्ज हो रही है। 90 फीसदी आनंदपुर साहिब होते हुए यहां आते हैं। इसी अनुसार प्रस्तावित रोपवे में प्रति घंटा 800 लोगों को लाने-ले जाने का प्रावधान रखा गया था।