पशु चिकित्सालय बसाल में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आयोजित।
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सरकार ग्रामीण स्तर पर पशु शेड का निर्माण करने के लिए अनुदान प्रदान कर रही है। अगर साथ में एक एक लावारिश पशु रखने की शर्त भी लगा दे, तो लावारिश पशुओं से छुटकारा पाने की दिशा में यह पहल कारगर सिद्ध होगी। राशन कार्ड की तर्ज पर अगर पशुओं के भी कार्ड बनाए जाएं तो लावारिश पशु सड़कों और चौराहों पर खुले में घुमते नहीं मिलेंगे और आम जनता को भी खूंखार पशुओं से निजात मिलेगी।
यह बात पशु चिकित्सालय बसाल में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान महेश चौधरी ने कही। साथ ही पशु चिकित्सालयों में देसी गायों के टीके भी आने चाहिए। इससे एक तो गुणकारी दूध प्राप्त होगा। लोग इन्हें छोड़ना भी बंद कर देंगे। पशुपालन विभाग से अलग हटकर इसका अलग से विभाग होना चाहिए तभी इन बेसहारा पशुओं पर नियंत्रण किया जा सकेगा। इस दौरान किसान, पशुपालक, संगठन और कारोबारियों ने प्रशासन और पशु पालन विभाग के माध्यम से एक एजेंडा तैयार करके सरकार को भेजा जाएगा।
लावारिश पशुओं के लिए विभाग नहीं बल्कि पशुपालक खूद जिम्मेदार हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते उचित प्रावधान नहीं किए गए तो आने वाले वक्त में स्थिति और भी बेदतर हो सकती है। सीमावर्ती राज्यों से रात के अंधेरे में जानवरों को सरेआम छोड़ा जा रहा है। फसलें चट की जा रही है। आम जनता को भी इस दिशा में सजग होना पड़ेगा। नियमों के तहत जिला प्रशासन, पुलिस से लेकर जिस जिस विभागीय अधिकारी की कोर्ट ने जिम्मेदारी सौंपी है। उसे अपनी डयूटी का निर्वहन धरातल पर करना होगा। सख्ती से पेश आने पर ही लावारिश पशुओं से निजात पाई जा सकती है।