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Amar Ujala Samvad: प्रगतिशील किसान बोले- लावारिश पशुओं से छुटकारा पाने को सरकार बनाए अलग विभाग, जानें

Tue, 04 Feb 2025 08:56 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना।

सार

पशु चिकित्सालय बसाल में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों ने कहा कि लावारिश पशुओं के लिए विभाग नहीं बल्कि पशुपालक खुद जिम्मेदार हैं। 
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पशु चिकित्सालय बसाल में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आयोजित। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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सरकार ग्रामीण स्तर पर पशु शेड का निर्माण करने के लिए अनुदान प्रदान कर रही है। अगर साथ में एक एक लावारिश पशु रखने की शर्त भी लगा दे, तो लावारिश पशुओं से छुटकारा पाने की दिशा में यह पहल कारगर सिद्ध होगी। राशन कार्ड की तर्ज पर अगर पशुओं के भी कार्ड बनाए जाएं तो लावारिश पशु सड़कों और चौराहों पर खुले में घुमते नहीं मिलेंगे और आम जनता को भी खूंखार पशुओं से निजात मिलेगी।

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यह बात पशु चिकित्सालय बसाल में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान महेश चौधरी ने कही। साथ ही पशु चिकित्सालयों में देसी गायों के टीके भी आने चाहिए। इससे एक तो गुणकारी दूध प्राप्त होगा। लोग इन्हें छोड़ना भी बंद कर देंगे। पशुपालन विभाग से अलग हटकर इसका अलग से विभाग होना चाहिए तभी इन बेसहारा पशुओं पर नियंत्रण किया जा सकेगा। इस दौरान किसान, पशुपालक, संगठन और कारोबारियों ने प्रशासन और पशु पालन विभाग के माध्यम से एक एजेंडा तैयार करके सरकार को भेजा जाएगा।

लावारिश पशुओं के लिए विभाग नहीं बल्कि पशुपालक खूद जिम्मेदार हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते उचित प्रावधान नहीं किए गए तो आने वाले वक्त में स्थिति और भी बेदतर हो सकती है। सीमावर्ती राज्यों से रात के अंधेरे में जानवरों को सरेआम छोड़ा जा रहा है। फसलें चट की जा रही है। आम जनता को भी इस दिशा में सजग होना पड़ेगा। नियमों के तहत जिला प्रशासन, पुलिस से लेकर जिस जिस विभागीय अधिकारी की कोर्ट ने जिम्मेदारी सौंपी है। उसे अपनी डयूटी का निर्वहन धरातल पर करना होगा। सख्ती से पेश आने पर ही लावारिश पशुओं से निजात पाई जा सकती है।

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लावारिस गोवंश की समस्या आज की नही काफी वर्षों से चली आ रही है। पिछली सरकारों ने इस सबंध में कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए। कहने को तो गाय को सभी गो माता कहते है। इसका कारण यह है कि देसी गाय के दूध में ए-टू नामक तत्व होता है जोकि महिलाओं के दूध में भी पाया जात है। युवा पीढ़ी को गोवशं के दूध और गोबर मूत्र कैसे गुणकारी महत्व के बारे में जागरूक करना होगा। विदेशी गाय की बजाय देशी गाय को तव्व्जों देने की अपील की है। विदेशी गाय के दूध से केंसर हो रहा है- महेश चौधरी निवासी बसाल।

सड़क पर और लोगों की फसलों में चर रहे बेसहारा गोवंश के लिए लोग ही जिम्मेदार है। जब पशु दूध देना बंद कर देता है, तब उसे उसी के हाल पर बेसहारा छोड़ देते हैं। किसानों के नुकसान के साथ सड़क पर घूम रहे पशुओं की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही है। सरकार को चाहिए कि गोशालाओं की क्षमता बढाई जाए और पंचायत के सहयोग से उन्हें गोशाला में समायोजित करें- अंकुश शर्मा बसाल निवासी

इन बेसहारा पशुओं के कारण आम जनता भी और किसान खर्च करके फसल उगाता है और रात को यह बेसहारा पशु आए दिन फसल चट कर जाते हैं। इनके कारण घटनाएं भी हो रही हैं। सरकार को समस्या का गंभीरता से संज्ञान ले लेना चाहिए। बाहरी राज्य पंजाब से रात के समय हिमाचल बाॅर्डर पर छोड़ देते हैं। जोकि जिला ऊना में आकर तबाही मचाते हैं- राजेश लठठ गांव पनोह।

लावारिस पशु छोड़ने वाले लोगों को पकड़ने के लिए पंचायत लेवल पर कमेटी बनाई जाए तथा उन्हें कुछ मेहनताना भी दिया जाए। पकड़ में आने पर भारी जुर्माना लगाया जाए। आज हर जगह सड़कों पर दिखाई देने वाले यह गोवंश की मुख्य वजह आम जनता ही है- अमन कुमार गांव तियूडी 

नागरिकों की तरह पशुओं के भी राशन कार्ड बनने चाहिए और गांव में प्रत्येक पशु को हर महीने उनके कार्ड पर फीड या अन्य खुराक सरकार द्वारा देने से भी इन पशुओं को लोग छोड़ना कम कर देंगे। क्योंकि सरकार द्वारा उन्हें खुराक दी जाएगी तथा उनके मालिक उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। पंचायत को भी इसकी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। तभी इन पर लगाम लगेगी- विजय कुमार कोटला खुर्द

विभाग और सरकार 700 रूपये प्रति पशु के हिसाब से खर्च देती है। इस समस्या का समाधान एकदम नहीं निकलेगा। एक एक सीढ़ी चढ़कर ही इसका हल निकल सकता है। कहा कि जैसे हम अपने बुजुर्ग को भी बूढ़ा होने के उपरांत प्यार करते है और कहीं नहीं छोड़ते। ऐसा ही गौ वंश के साथ होना चाहिए।

विभाग द्वारा अब केवल बछड़ियां देने वाले इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जिसमें 90 प्रतिशत सफलता मिल रही है। कहा कि बिना जनता के सहयोग से विभाग अकेला कुछ नहीं कर सकता है- डॉ. दीपिका जोशी, पशु चिकित्सक।
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