एबीवीपी ने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा हासिल करने का प्रयास करते हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क उनके लिए बड़ी चुनौती बनेगा। एबीवीपी इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कहा कि शिक्षा को व्यापारिक व्यवस्था में नहीं बदला जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में हॉस्टल, लाइब्रेरी और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है लेकिन इसके बावजूद फीस बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया। संगठन ने प्रशासन से बढ़ी हुई फीस को तुरंत वापस लेने की मांग की है। एबीवीपी ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक क्रमिक भूख हड़ताल जारी रहेगी। संगठन के अनुसार आने वाले दिनों में अन्य कार्यकर्ता भी बारी-बारी से अनशन में शामिल होंगे। एबीवीपी ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय की नीतियों में छात्रों की भागीदारी जरूरी है और छात्र प्रतिनिधित्व नहीं होने से छात्र हितों से जुड़े मुद्दे प्रभावी तरीके से सामने नहीं आ पाते।