उद्योगपतियों का कहना है कि प्रदेश सरकार की नीतियों में अचानक बदलाव, टैक्स में बढ़ोतरी, बैंकों से समय पर ऋण न मिलना, बिजली और परिवहन खर्च बढ़ने तथा उत्पादन लागत में लगातार इजाफा होने से उद्योगों के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। कई इकाइयां आर्थिक दबाव के कारण बंद हुईं, जबकि कुछ वर्षों से निष्क्रिय पड़ी हैं। उधर, उद्योग विभाग लंबे समय से बंद पड़े उद्योगों को नोटिस जारी कर जवाब मांग रहा है। विभाग का कहना है कि जिन इकाइयों ने निर्माण कार्य या उत्पादन शुरू नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
ऊना के जीतपुर बेहड़ी में चार वर्ष पहले इथेनॉल प्लांट लगाने के लिए 30 एकड़ भूमि एचसीएएल को आवंटित की गई थी। करीब 500 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट पर आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। उद्योग विभाग कंपनी को दो बार नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।
मैहतपुर उद्योग संघ के अध्यक्ष सीएस कपूर ने बताया कि पंडोगा में उद्योग स्थापित करने के लिए एक उद्योगपति आठ महीने तक बैंक के चक्कर काटते रहे। लंबी प्रक्रिया के बाद बैंक ने यह कहकर ऋण देने से इन्कार कर दिया कि प्रोजेक्ट को फाइनेंस नहीं किया जा सकता। उद्योगपतियों का कहना है कि ऐसी अड़चनें निवेश के रास्ते रोक रही हैं।
जिन इकाइयों ने निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है या उत्पादन शुरू नहीं किया है, उन्हें नोटिस भेजकर जवाब मांगा जा रहा है। - अंशुल धीमान, संयुक्त निदेशक, उद्योग विभाग
उधर, ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की ओर से दिल्ली बंद के चलते ट्रक यूनियन नालागढ़ से पिछले दो दिन से कोई भी ट्रक दिल्ली के लिए नहीं गया। इससे ट्रक संचालकों को तो नुकसान हुआ ही, उद्योगपतियों का तैयार माल नहीं जा सका। चार दिन में ट्रक यूनियन को 12 से 15 करोड़ रुपये का नुकसान होने की संभावना है। ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में हड़ताल की हुई है। दिल्ली में बाहर से कोई भी गाड़ी प्रवेश नहीं कर पा रही है। ट्रक यूनियन नालागढ़ ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया है। बुधवार से कोई भी ट्रक दिल्ली के लिए रवाना नहीं हुआ। बीबीएन से प्रतिदिन 150 ट्रक दिल्ली सामान लेकर जाते हैं, लेकिन चार दिन तक ट्रक हड़ताल के चलते नहीं जाएंगे।
एक ट्रक को दिल्ली सामान छोड़ने का भाड़ा 25 हजार रुपये मिलता है। एक दिन में 150 ट्रक संचालकों को करीब 3.75 करोड़ का नुकसान हुआ है। जो उद्योग जितना माल तैयार करते हैं और उतना ही सप्लाई करते हैं, उनको चार दिन दिन के लिए अपना उत्पादन बंद रखना पड़ेगा। ट्रक संचालक कृष्ण कौशल ने बताया कि दिल्ली में लगने वाली एंट्री टैक्स नाजायज है। ट्रक यूनियन के प्रधान विद्या रतन ने बताया कि दिल्ली बंद होने के कारण दिल्ली के लिए कोई माल चार दिन तक नहीं भरा जाएगा। 24 को दिल्ली के लिए माल भेजना शुरू कर दिया जाएगा। बीबीएनआईए के महासचिव रजनीश विज ने कहा कि कुछ छोटे उद्योगों में सामान रखने की जगह नहीं है। यह उद्योग पुराना माल भेजने के बाद नया माल तैयार करते हैं। उद्योगों में चार दिन सप्लाई न होने से उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है।