जांच में पता चला कि यह धोखाधड़ी न केवल आयुष्मान, बल्कि हिमाचल की हिमकेयर योजना के तहत भी चल रही थी। फर्जीवाड़े का असली मास्टरमाइंड जाटव है। उसने सबसे पहले पीजीआई में आयुष्मान कार्ड बनवाने वाले अजय कुमार के साथ सांठगांठ की और अमृत फार्मेसी से जुड़े लोगों को साथ मिला लिया। पीजीआई में जिन मरीजों का आयुष्मान और हिमकेयर कार्ड के जरिए इलाज होता था और वे इलाज कराकर चले जाते थे, यह फर्जीवाड़ा उन्हीं मरीजों के नाम पर किया जाता था। जाटव के कहने पर अजय आयुष्मान के तहत इलाज कराने वाले मरीजों का डाटा निकालता था और उसे जाटव को देता था।
जाटव इन मरीजों के दोबारा कार्ड बनवाता और उन पर महंगी दवाइयां लिखता, साथ ही डॉक्टरों के नाम की फर्जी मुहर लगाता था। इन पर्चियों को रमन अमृत फार्मेसी ले जाता था और वहां से रोजाना हजारों रुपये की मुफ्त दवाइयां लाकर ब्रदर्स फार्मेसी में जाटव को देता था। जाटव इन्हें 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट पर बेचता था। कमाई में गिरोह के सभी सदस्यों का हिस्सा तय था। सूत्रों के अनुसार फर्जीवाड़े में यूटी पुलिस के पूर्व डीजीपी पर भी एक आरएसएस से जुड़े सदस्य ने एक व्यक्ति का नाम निकालने का दबाव बनाया गया था। अब तक इस फर्जीवाड़े में 7 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।