मुख्य सूचना आयुक्त ने आरटीआई के तहत सूचना देने में देरी पर हिमाचल वन कार्य मंडल के दो वरिष्ठ सहायकों को जुर्माना लगाया है। साथ ही संबंधित विभाग को रिकार्ड का सही रखरखाव सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।
मुख्य सूचना आयुक्त भीमसेन ने हमीरपुर के आरटीआई कार्यकर्ता ओंकार सिंह चंदेल की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया।
आरटीआई कार्यकर्ता ओंकार सिंह चंदेल ने मंडलीय प्रबंधक वन निगम धर्मशाला से दैनिक वेतन भोगी कर्मी के मस्टररोल की प्रति उपलब्ध करवाने को प्रार्थना पत्र दिया था।
जन सूचना अधिकारी ने प्रार्थना पत्र प्राप्त होने के 100 दिन के बाद भी कोई उत्तर नहीं दिया। इसके चलते राज्य सूचना आयोग में अपील की। सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि प्रार्थना पत्र पर कोई कार्रवाई न करने के लिए आरटीआई सीट देख रहा वरिष्ठ सहायक जिम्मेवार है।
आयोग ने कर्मचारी को 100 दिन से अधिक की देरी का दोषी मानते हुए 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया। कर्मचारी को पांच समान किस्तों में जुर्माना राशि सरकारी खजाने में जमा करवानी होगी।
दूसरे मामले में चंदेल ने वन निगम से एक मामले के तहत अधिकारी, कर्मचारी को जारी नोटिस की प्रति, उनके की ओर से प्रेषित उत्तर तथा मंडलीय प्रबंधक द्वारा की गई कार्रवाई की प्रति आरटीआई सूचना के तहत मांगी थी। इस मामले में मंडलीय प्रबंधक वन निगम कार्यालय हमीरपुर में कार्यरत वरिष्ठ सहायक को भी आयोग ने सूचना देने में देरी करने का दोषी पाया है।
एक्ट के तहत सूचना देने में 30 दिन की देरी के लिए वरिष्ठ सहायक को 7500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। कर्मचारी को जुर्माना राशि सरकारी खजाने में जमा करवानी होगी। आरटीआई कार्यकर्ता ओंकार सिंह चंदेल ने बताया कि मुख्य सूचना आयुक्त ने अन्य मामले की सुनवाई करते हुए सीएमओ हमीरपुर को 1000 रुपये, राज्य वन विकास निगम शिमला को 2500 रुपये कंपन्सेशन के रूप में अदा करने के निर्देश दिए हैं।