परिवार का कहना है कि अद्वैत ने इतनी कम उम्र में जिस तरह शब्दों को याद किया, वह उसके असाधारण स्मरण शक्ति का परिचायक है। अद्वैत के परिवार ने बताया कि बच्चे की सीखने की शुरुआत खेल-खेल में हुई। माता वंदना ठाकुर उसे सुलाते समय अलग-अलग शब्दों से परिचित करवाती थीं। धीरे-धीरे यही शब्द अद्वैत की जिंदगी का हिस्सा बन गए। परिवार के अनुसार, सोते सोते सुनी गई बातें भी अद्वैत याद रखने लगा। बाद में किताबों के माध्यम से उसे शब्दों के ज्ञान से जोड़ा गया। खास बात यह रही कि वह शब्दों को केवल सुनता ही नहीं था, बल्कि उन्हें याद कर उनके विलोम शब्द भी बताने लगा।
जहां इस उम्र में अधिकांश बच्चे बोलना और नए शब्द सीखना शुरू कर रहे होते हैं, वहीं अद्वैत ने अपनी प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई है। उसकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि बच्चों की सीखने की क्षमता को सही दिशा, निरंतर अभ्यास और परिवार का प्रोत्साहन मिले तो वे कम उम्र में भी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। बेटे की इस उपलब्धि ने न केवल परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि क्षेत्र में भी खुशी की लहर है। नन्हे अद्वैत की कहानी उन अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है, जो बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल और सहज तरीके से नई चीजें सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं।