भले ही प्रदेश सरकार सरस्वती नदी को धरा पर लाने में गंभीर हो, 13 किलोमीटर क्षेत्र में इसकी खुदाई में रोडा हट नहीं पा रहा। राजस्व रिकार्ड में करीब 13 किलोमीटर का एरिया सरस्वती नदी के नाम पर नहीं होने से यह दिक्कत खड़ी हुई है। सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ने का जो ट्रायल किया है, वह आधी सरस्वती नदी में ही सीमट कर रह गया। अब वालियंटर्स के माध्यम से जमीन के मालिकों को स्वेच्छा से अपनी जमीन देने के लिए राजी करने का प्रयास होगा।
जिला प्रशासन द्वारा रुलाहेड़ी से लेकर ऊंचा चांदना तक सरस्वती नदी की खुदाई करवाई गई है। इसकी कुल लंबाई करीब 31 किलोमीटर है। राजस्व रिकार्ड में करीब 18 किलोमीटर का एरिया सरस्वती के नाम पर दर्ज है। रिकार्ड में शेष 13 किलोमीटर में यह निजी मलकियत है। इस कारण प्रशासन यहां खुदाई नहीं करवा पाया है। सिंचाई विभाग अब आधी अधूरी खुदी सरस्वती नदी को ही रूप देने में जुटा है। इसके लिए बीते दिनों दादूपुर-नलवी नहर का पानी छोड़कर ट्रायल किया गया। ऊंचा चंदना में दादुपुर-नलवी नहर सरस्वती नदी को क्रास करती है। इस प्वाइंट पर ही इस नहर का पानी सरस्वती नदी में छोड़ा गया, जो कि मुस्तफाबाद ब्लाक में खोदी गई सरस्वती नदी में ही आया। मुस्तफाबाद और बिलासपुर के बीच में करीब 13 किलोमीटर तक नदी की खुदाई न हो पाने से सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माने जाने वाले आदिबद्री के नजदीक रुलाहेड़ी से लेकर बिलासपुर खंड की सीमा तक की गई नदी की खुदाई में यह पानी नहीं आ पाया।
अब नदी के लाभ बता जमीन मालिकों को करेंगे तैयार
सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि भले ही राजस्व रिकार्ड में करीब 13 किलोमीटर का एरिया सरस्वती के नाम पर नहीं है। लेकिन सर्वे आफ इंडिया की टॉपर शीट में सरस्वती नदी इस 13 किलोमीटर के क्षेत्र से ही गुजरती है। इस 13 किलोमीटर क्षेत्र में करीब साढ़े छह किलोमीटर लंबाई में तो यह नदी के रूप में ही है। वालियंटर्स के माध्यम से जमीन के मालिकों को समझाया जाएगा कि यदि सरस्वती नदी के लिए वे अपनी थोड़ी जमीन स्वेच्छा से छोड़ते है तो इससे उन्हें ही फायदा होगा। इससे उन्हें पानी मिलता रहेगा और साथ ही आसपास का भूमिगत जल भी ऊपर आएगा। इसके साथ ही इससे करोड़ों की आस्था भी जुड़ी है।
पिछले साल शुरू हुई थी खुदाई
जिला प्रशासन ने 21 अप्रैल 2015 को जिले के रुलाहेड़ी गांव से राजस्व रिकार्ड के अनुसार सरस्वती नदी की खुदाई शुरू की थी। रुलाहेड़ी से आगे मुगलवाली, रामपुर बीहटा, संधाय, भानोपुर, मोड़ी, आंबवाला, बिलासपुर, टेहा, टेही और ब्राह्मण खेड़ा तक खुदाई की गई। ब्राह्मण खेड़ा के आगे मुस्तफाबाद ब्लाक शुरू हो जाता है। मुस्तफाबाद खंड के तलाकौर, खेड़ा, नगला जागीर आदि गांवों में सरस्वती नदी निजी मलकियत के रूप में राजस्व रिकार्ड में दर्ज है। जिस कारण यहां खुदाई नहीं हो पाई। इसके आगे दौलतपुर, सबलपुर, माली माजरा, मुस्तफाबाद व ऊंचा चांदना में खुदाई की गई है। चार मई 2015 को मुगलवाली गांव में खुदाई के दौरान जमीन से नीचे से पानी निकला था। भू वैज्ञानिकों द्वारा की गई जांच मं यह पानी हिमालय क्षेत्र का बताया गया था।
तब करते थे नदी की मिट्टी का तिलक
50 साल पहले तक यमुनानगर जिले में सरस्वती नदी धरा पर बहती थी। यह नदी आदिबद्री से शुरू होकर बिलासपुर व मुस्तफाबाद से होकर गुजरती थी। बिलासपुर के रहने वाले 70 वर्षीय मास्टर रवि भूषण बताते हैै कि उस समय लोगों में इस नदी के प्रति अपार श्रद्धा थी। बचपन में वह इस नदी में खूब नहाए। उस दौरान लोग चप्पल पहनकर नदी में नहीं उतरते थे और नदी पार करते समय अपनी चप्पलें हाथ में पकड़ लेते थे। लोग नदी की मिट्टी का तिलक भी लगाते थे। नदी की चौड़ाई कहीं 20 फुट तो कही पांच फुट थी। समय गुजरने के साथ-साथ नदी में पानी कम होने लगा और लोगों ने नदी को अपने खेतों में मिला था। अतिक्रमण के चलते यह नदी धरती से गायब हो गई। यही नदी जिस इलाके से गुजरती थी, राजस्व रिकार्ड में वह आज भी सरस्वती के नाम पर दर्ज है।
वर्जन-
मुस्तफाबाद ब्लाक में खोदी गई सरस्वती नदी में दादुपुर-नलवी नहर का पानी छोड़कर उसे चेक किया गया है। यह पानी बिलासपुर ब्लाक में खोदी गई नदी में नहीं गया क्योंकि बिलासपुर और मुस्तफाबाद के बीच नदी की खुदाई नहीं हुई है।
विनोद कांबोज, सुप्रिटेंडिंग इंजीनियर, सिंचाई विभाग