संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। घोड़ो पीपली गांव की महिलाएं आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहीं हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ पर महिलाएं स्वरोजगार कर रही हैं। इससे वे परिवार की आर्थिक स्थित मजबूत कर समाज को आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं।
गांव बबली ने पशुपालन और किचन गार्डन के साथ महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर अलग पहचान बनाई है। वह महिलाओं को पशुपालन, सब्जी उत्पादन और अन्य रोजगारपरक गतिविधियों की जानकारी देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। बबली गांव में महिलाओं के समूह और ग्राम संगठन की बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
गांव में वर्ष 2018 में आरती स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया था। समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं। समूह की प्रधान बबली, सचिव उषा रानी और खजांची मोनी हैं। इनके अलावा अंगूरी, बीता, गुड्डी, कौशिल, सिरजेश, प्रमला और रीटा समूह की सदस्य हैं। समूह की महिलाएं पशुपालन, डेयरी, खेतीबाड़ी, सिलाई-कढ़ाई, फास्टफूड और सब्जी उत्पादन जैसे कार्यों से जुड़ी हैं।
सचिव उषा रानी डेयरी का काम करती हैं, जबकि खजांची मोनी खेतीबाड़ी से जुड़ी हैं। अंगूरी और बीता पशुपालन करती हैं। गुड्डी ने फास्टफूड की दुकान खोल रखी है। कौशिल सब्जी उत्पादन कर रही हैं। वहीं सिरजेश, प्रमला और रीटा खेतीबाड़ी का काम कर परिवार की आय बढ़ाने में सहयोग कर रही हैं। पशुपालन के माध्यम से महिलाएं दूध उत्पादन कर स्वरोजगार हासिल कर रही हैं।
बबली ने बताया कि समूह की ओर से महीने में चार बैठकें आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में महिलाओं को बचत, स्वरोजगार और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी जाती है। ग्राम संगठन की भी दो बैठकें आयोजित होती हैं। आरती समूह ग्राम संगठन भूमिका के अंतर्गत आता है और क्लस्टर सद्भावना से जुड़ा है।
बबली ग्राम संगठन की प्रधान होने के साथ विलेज फैसिलिटेटर और सीनियर पीआरसी की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। वह करीब 10 समूहों की वीएफ के रूप में महिलाओं को मार्गदर्शन देती हैं। बबली का कहना है कि महिलाओं को यदि सही दिशा और अवसर मिले तो वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर बन सकती हैं। समूह से जुड़ी महिलाओं के प्रयास गांव में महिला सशक्तीकरण की मिसाल बन रहे हैं।