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Yamuna Nagar News: झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों का संवारेंगे भविष्य

Sun, 08 Dec 2024 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। जिले की झुग्गी-झोपड़ी में रह रहे और शिक्षा से दूर बच्चों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने के लिए बाल संरक्षण विभाग की ओर से योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चों का ब्रिज कोर्स से भविष्य सुधारा जाएगा। ऐसे बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाई जाएगी, ताकि उनकी स्कूल जाने की आदत बने और इस दिशा में आगे बढ़े।
जिला बाल संरक्षण विभाग ने शहर के चार स्थानों पर बनी झुग्गी झोपड़ियों में सर्वे कर बच्चों को चयनित किया गया है। इन बस्तियों में बच्चों की संख्या ज्यादा और यह स्कूल नहीं जाते हैं। इन बस्तियों के बच्चे दिनभर मारे-मारे फिरते हैं। कई कूड़ा बिनते हैं तो कई चौक चौराहों पर गाड़ियों के शीशे साफ कर पैसे कमाते हैं। अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने में गंभीर नहीं हैं।
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माता-पिता के दिहाड़ी पर चले जाने के बाद बच्चे भी इधर-उधर धक्के खाकर पैसे कमाने का प्रयास करते हैं। कई बच्चे तो ऐसे हैं जो भीख तक मांगते हैं। ऐसे बच्चों के पुनर्वास के लिए विभाग की ओर से ब्रिज कोर्स करवाया जा रहा है। विभाग की ओर से शहर में चार स्थानों पर बस्तियों को चयनित किया गया है।
इस दौरान रेलवे स्टेशन के पास बनी स्लम बस्ती, जगाधरी बस स्टैंड के पास, तीर्थनगर व जगाधरी रोड पर पंचायत भवन के पास स्थित बस्तियों को चिन्हित किया गया है। यहां से अभी तक 15 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। इस दौरान सबसे ज्यादा बाड़ी माजरा की स्लम बस्ती के बच्चों को ब्रिज कोर्स से जोड़ा गया है।

विभाग की ओर से स्कूल न जाने वाले बच्चों को चयनित कर उन्हें अक्षर ज्ञान दिया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से वॉलंटियर्स लगाए गए हैं। स्वयंसेवक इन बस्तियों में पहुंचकर ऐसे बच्चों को चयनित कर रहे हैं। विभाग की ओर से अभी तक करीब 50 बच्चों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। इसके अंतर्गत बाड़ी माजरा में 25 बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा कई बच्चों को सरकारी स्कूलों में भर्ती किया गया है।
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विभाग की ओर से स्लम बस्तियों के स्कूल से दूर बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए विशेष योजना बनाकर काम किया जा रहा है। बच्चों को ब्रिजकोर्स के माध्यम से अक्षरज्ञान दिया जा रहा है। इसे लेकर वॉलंटियर्स बच्चों को पढ़ा रहे हैं, ताकि उनकी शिक्षा में रूचि बने और उन्हें स्कूल में भर्ती किया जा सके। - रंजन शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी।

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