यमुनानगर। खंड छछरौली के जैतपुर गांव की आबादी 1900 है। यहां वर्ष 1995 में राजकीय माध्यमिक विद्यालय बना। इसे बने भी 30 साल हो गए। स्कूल में आठ से नौ कमरे व विद्यार्थियों के लिए मैदान भी है, लेकिन पिछले काफी समय स्कूल की स्थिति ठीक नहीं। इसकी इमारत से बारिश का पानी टपकने लगा, दीवारों पर हुए प्लास्टर में भी दरारें आ गईं। स्कूल का फर्श भी जगह-जगह से उखड़ गया। पानी का रिसाव होने के कारण दीवारों व छतों पर काई जम चुकी है। शौचालयों की दशा भी ठीक नहीं है।
यहां पहली से लेकर आठवीं तक विद्यार्थियों की संख्या भी लगभग 160 है, लेकिन इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक तक नहीं। ऐसे में ये स्कूल शिक्षक विहीन है। विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए पड़ोस के सरकारी स्कूल के दो टीचरों को अस्थाई तौर पर यहां लगाया गया है। यहां तक वर्ष 2023 में स्कूल में टीचरों की संख्या चार तक थी। लेकिन, बाहरी जिलों जैसे, जींद, कैथल इत्यादि टीचर सिफारिश लगवाकर अपने गृहक्षेत्र में चले गए। ऐसे में स्कूल में टीचरों का टोटा हो गया। जबकि इस स्कूल में सात से आठ शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। संवाद
खेल के मैदान में घास, पानी की भी नहीं निकासीविद्यार्थियों के खेलने के लिए स्कूल में मैदान जरूर है, लेकिन उसमें बड़ी-बड़ी घास है। निकासी न होने के चलते बारिश के दिनों में यहां पानी जमा हो जाता है। ग्रामीण हारून, साजिद, मुदस्सिर, असलम, सोहिल व दिलशाद का कहना है जैतपुर के स्कूल की बिल्डिंग लगभग तीस साल पहले बनी थी। बारिश में बिल्डिंग से पानी टपकता है। हर समय यही डर लगा रहता है कि कहीं बिल्डिंग न ढह जाए और कोई अनहोनी ना हो जाए। ग्रामीणों का कहना है कि घाड़ क्षेत्र के गांवों में ज्यादातर मजदूर लोग हैं जो निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ा नहीं सकते। संवाद
शिक्षकों की आवश्यकता : असलम
स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के प्रधान असलम ने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों का भारी टोटा है। बिल्डिंग भी ठीक नहीं, बारिश के दिनों में पानी टपकता है। शिक्षा विभाग को विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए शिक्षकों की संख्या बढ़ानी चाहिए। बच्चे दूर के दूसरे स्कूल में न जाए, इसीलिए गांव के स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे।
हमने कई बार मुद्दा उठाया : इरफान
जैतपुर के सरपंच इरफान का कहना है स्कूल में शिक्षक नहीं है। दूसरे स्कूल के शिक्षक आकर यहां पढ़ा रहे हैं। जो शिक्षक थे वे अपने तबादले करवाकर चले गए।स्कूल के भवन की हालत दयनीय होती जा रही। हमने कई बार शिक्षा विभाग से लेकर स्थानीय विधायक, मंत्री तक इस मुद्दे को उठाया और शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की मांग की, लेकिन कोई हमारी सुनता नहीं है।
स्कूल शिक्षक विहीन है। दूसरे सरकारी स्कूल के दो अध्यापकों को चार-चार क्लास की जिम्मेदारी दी है। बच्चों को पूरी तरह से पढ़ाया ज रहा है। जो पहले शिक्षक थे वे तबादला कराकर अपने गृहक्षेत्र में चले गए इसलिए दिक्कत आ रही है। -कर्म सिंह, डीडीओ, जैतपुर।