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बारिश में डूबने के डर से चिंतित हैं गांव लापरा के लोग

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बड़ा लापरा की मेन सड़क पर जमा बरसात का पानी। - फोटो : YAMUNA NAGAR
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साल 2013 और 2017, इन सालों को शायद शहर वासी भूल गये हों। लेकिन गांव लापरा के बाशिंदे इसे नहीं भूल पाये। इन सालों में आई बाढ़ ने गांव में तबाही मचाकर रखी। पूरा गांव बाढ़ की चपेट में था। जहां-जहां भी नजर डालो पानी ही पानी था। वहीं जिले में चार दिन से हो रही बारिश ने फिर से लापरा गांव के ग्रामीणों की टेंशन को बढ़ाकर रख दिया। उन्हें डर है कहीं इस बार भी गांव में बाढ़ जैसे हालात न बन जाएं। चूंकि गांव से बीस कदम दूरी पर ही यमुना नदी है। जिसका पानी घुसने से पूरा गांव डूब जाता है। दरअसल, गांव में पानी की निकासी न होने के कारण हर साल यहां बाढ़ जैसे हालात बने रहते हैं। जिसका खामियाजा इन ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।
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छत व थर्मल प्लांट की पटरी पर गुजारी रातें : ग्रामीण मतलूम, अमीर हसन, मोहम्मद, मसरूम का कहना है कि सबसे ज्यादा बुरे हालात 2013-17 में बने थे। पूरा गांव बाढ़ की चपेट में था। लोगों को घरों की छत व थर्मल प्लांट कि 20 से 25 फीट पटरी पर रहना पड़ा। जब तक पानी नहीं उतरा लोगों को इसी स्थान पर रातें गुजारनी पड़ी।
इसलिये डूबता है लापरा गांव : दरअसल, छोटा लापरा ऊंचाई पर है और बिल्कुल यमुना नदी के किनारे पर बसा है। इस गांव से महज दस कदम दूरी पर ही बड़ा लापरा है जोकि नीचले स्तर पर बसा है। दोनों गांवों की एक ही पंचायत है और दोनों गांव की कुल आबादी 4100 है। लेकिन बड़ा लापरा नीचले स्तर व निकासी न होने के कारण हर साल यमुना नदी के पानी से डूब जाता है। गांव में पानी पांच से छह फीट तक पहुंच जाता है। ग्रामीणों के मुुताबिक बाढ़ से उन्हें 50 हजार से दो लाख रुपये तक नुकसान उठाना पड़ता है।
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गांव की मेन सड़क पर जमा एक से डेढ़ फीट पानी : जिले में चार दिन से हो रही बारिश के कारण बड़ा लापरा की मेन सड़क पर एक से डेढ़ फीट बारिश का पानी जमा है। गांव के सरपंच के मुताबिक यदि इस सड़क को ऊंचा उठाकर बनाया जाये तो पानी जमा नहीं होगा। दूसरा मेन सड़क नीचे होने तक नालियां ऊंची होने पर पानी की निकासी नहीं हो पाती है इसलिये यहां पानी जमा रहता है।
रेजुलेशन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई : गांव के सरपंच अजीम खान का कहना है उन्होंने गांव के पानी की निकासी के लिये इस सड़क को बनवाने के लिये रेजुलेशन भी प्रशासन को दे रखा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी ढील व लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। उधर, लगातार चल रही बारिश को देखकर ग्रामीण अपने सामान को बचाने में जुट गये हैं।
बैैराज से पानी छोड़ने पर बनती है स्थिति विकट : हालांकि अभी यमुना नदी में पानी कम है लेकिन जब हथिनी कुंड बैराज पर लाखों में क्यूसेक पानी हो जाता है तो डैम को बचाने के लिये पानी को यमुना नदी में छोड़ दिया जाता है। नदी में पानी आने के बाद वह दूर-दूर तक मार्क करती है। जिसकी चपेट में यमुना नदी से सटे गांव आ जाते हैं। पिछली बार हथिनी कुंड बैराज से लगभग 6 लाख क्यूसेक से ज्यादा का पानी छोड़ा गया। ये स्तर हाई फ्लड लेवल के दो गुना ज्यादा रहा। जिससे यमुनानगर के नदी से लगते कई गांवों में पानी घुस गया था। छोटा लापरा ,बड़ा लापरा, कैत मंडी और बीबी पुर सहित कई गावों को प्रशासन ने खाली करवा लिया था।
गांव में बाढ़ की स्थिति न बने। इसके लिये सोमवार को अधिकारियों को मौके पर भेजा जायेगा। जहां कहीं पानी की निकासी की दिक्कत आ रही है। उसका समाधान करवा दिया जायेगा।
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-घनश्याम दास अरोड़ा, विधायक।
फोटो- 16 से 24 तक
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