जठलाना। जिले में पिछले कुछ दिनों से हो रही बेमौसमी बारिश और आंधी-तूफान ने आम लोगों को गर्मी से कुछ हद तक राहत पहुंचाई है। वहीं यह बागवानी किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। हाल ही में आई तेज आंधी-तूफान ने आम पर आए बौर को झाड़ दिया है। इससे बागवानी किसानों की ओर से ने आम की पैदावार में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
जिले के किसान हर साल आम की अच्छी पैदावार से मुनाफा कमाते हैं। यूपी से सटे जिले में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जैसे इलाकों से भी आम आता है, जिससे यहां के बाजारों में आम सस्ता और गुणवत्तापूर्ण मिलता है। इस बार आम का उत्पादन कम होने से किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
बागवानी विभाग के अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि इस बार आम की पैदावार में गिरावट तय है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री बागवानी योजना के तहत अपनी फसलों का पंजीकरण अवश्य कराएं। योजना के अनुसार सब्जी किसानों को 750 रुपये प्रति एकड़ और फल किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ पंजीकरण शुल्क देना होता है।
पंजीकरण कराने वाले किसानों को मौसम की मार से नुकसान होने की स्थिति में हरियाणा सरकार द्वारा सहायता राशि दी जाती है। फल किसानों को 40,000 रुपये प्रति एकड़ और सब्जी किसानों को 30,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा प्रदान किया जाता है। यह योजना किसानों के लिए संकट के समय राहत प्रदान कर सकती है। संवाद
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किराए पर बाग लेने वालों को भी नुकसान
जिले में आम के कई बाग उत्तर प्रदेश के किसानों की ओर से ठेके पर लिए जाते हैं। उन्हें भी इस बार नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि आम की फसल घटने से मुनाफा कम होता दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि मौसम की मार का असर कीमतों पर किस तरह से पड़ता है। इस बार आम न केवल महंगा हो सकता है बल्कि उसका स्वाद भी उपभोक्ताओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकता।