यमुनानगर। रेलवे की ओर से ब्लाक (ट्रेनें रोकने की अनुमति)नहीं मिलने से कंपनी अब तक पुल को शिफ्ट नहीं कर सकी है। इसके कारण ट्रेनों को दरकी हुई कलानौर रेलवे पुलिया (पुल संख्या 245)से गुजरना पड़ रहा है। इससे लाखों यात्रियों की जान जोखिम में पड़ी रहती हैं।
उत्तराखंड आपदा के समय यमुना नदी में आई बाढ़ के दौरान यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। इस दौरान कई दिनों तक ट्रेनों का इस पुलिया से आवागमन बंद करना पड़ा था। अस्थाई समाधान के बाद पुलिया से आठ माह बाद भी ट्रेनें ऐसे ही गुजर रही है। जो ट्रेनें 120 से 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड पर इस पुलिया से गुजर रही थी आज उनकी स्पीड 25 किलोमीटर प्रतिघंटा ही रह गई है। टूटी पुलिया से कभी भी हादसा हो सकता है दूसरा ट्रेन की स्पीड कम होने से यात्री भी अपने गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। रेलवे ने पुलिया के दोबारा से निर्माण के लिए डीएस कांट्रेक्ट कंपनी को जिम्मेदारी दी हुई। कंपनी पदाधिकारियों का कहना है कि उनका काम तीन माह से पूरा है। रेलवे की ओर से ब्लाक (ट्रेनें रोकने की अनुमति)नहीं मिल रहा है जिस दिन भी ब्लाक मिल जाएगा उसी दिन पुलिया को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं
जगाधरी-सहारनपुर ट्रैक से प्रतिदिन दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनें आवागमन होता है। इन ट्रेनों में लाखों यात्री सफर करते हैं। क्षतिग्रस्त हुई पुलिया से ट्रेनें गुजरने से कभी भी यहां पर बड़ा हादसा हो सकता है। क्योंकि बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई पुलिया को अभी मिट्टी के कट्टे व लोहे के गाटर लगाकर स्पोर्ट लगाई हुई है। कंपनी की ओर से नई पुलिया के लिए वैल तैयार किए हुए हैं, लेकिन रेलवे की ओर से ब्लाक न मिल पाने से वे जोड़े नहीं जा सके हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पिछले काफी समय से इस पुलिया से ट्रेनें 15 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से गुजर रही थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से स्पीड को 25 किलोमीटर प्रतिघंटा किया गया है। ताकि ट्रेनों के टाइम पर ज्यादा प्रभाव न पड़े।
नई तकनीक से बन रहा पुल
अगर देखा जाए तो यहां पर रेलवे अपने ही नियम पर खरा नहीं उतर रहा है। 18 जुलाई को इस पुल का करीब एक करोड़ रुपये का टेंडर किया गया। कंपनी को तीन माह में पुल बनाकर पुरानी पुलिया के स्थान पर शिफ्ट करना था। कंपनी ने तो तय समय पर काम पूरा कर दिया। कंपनी ने पुलिया के वैल बनाने का काम अक्टूबर माह में पूरा कर दिया था। लेकिन वैल को अभी तक पुरानी पुलिया की जगह पर स्थानांतरित नहीं किया गया है। इसका कारण ब्लाक न मिलना है। क्योंकि पुल का स्थानांतरित करने के लिए कम से कम 12 घंटे का ब्लाक चाहिए। तब जाकर ही नया पुल फिट किया जा सकता है। कंपनी पदाधिकारियों का कहना है कि ब्लाक के लिए दिल्ली फाइल गई हुई है। इसकी अनुमति उत्तर रेलवे के चीफ रेलवे सिक्योरिटी (सीआरएस) की ओर से दी जानी है।
वर्जन
ब्लाक की मंजूरी के लिए फाइल दिल्ली भेजी हुई है। पहले 23 फरवरी का ब्लाक की कॉल आई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से उसे रदद कर दिया गया है। अब मार्च के पहले सप्ताह में इसकी अनुमति मिलने की संभावना है।
पंकज कुमार, रेलवे के इंजीनियर