संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। पहाड़ों से आए पानी के कारण सोम नदी में उफान आ गया। पानी बनकट गांव में निर्माणाधीन पटरी को बह ले गया। यहां दो हजार फीट पटरी बह गई। पानी साथ लगती फसलों में घुस गया और करीब 400 एकड़ फसल प्रभावित हो गई। हालांकि अभी नदी शांत है।
सिंचाई विभाग ने पटरी का निर्माण तो कर दिया था, पर उसके ऊपर लगाए जाने वाले पत्थर के पैचिंग को नहीं लगाया गया। जिसकी वजह से नदी में आए पानी में पटरी में कटाव कर दिया और लगभग दो हजार फिट पटरी पानी के साथ बह गई। ग्रामीणों का कहना है कि देर से शुरू कराए गए बाढ़ राहत बचाव कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि पटरी के साथ पैचिंग पत्थर लगाया जाता तो किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद होने से बच जाती।
पटरी पर पत्थर नहीं लगाए
किसान सुखविंद्र ने कहा कि सोम नदी की पटरी बनाने वाले ठेकेदार ने तो कार्य पूरा कर दिया था पर पटरी के ऊपर कटाव को रोकने वाला पत्थर का समय पर नहीं लग सका जो इस नुकसान का कारण है। पटरी की मजबूती के लिए तुरंत पत्थर का पैचिंग लगाया जाना चाहिए था।
इससे बड़ा दुख नहीं
किसान बलबीर सिंह ने एक किसान फसल की तैयारी के लिए आढ़ती से कर्ज उठाकर फसल लगाने के लिए खेत तैयार करता है। उसके बाद विभाग व सरकार के लापरवाही के कारण जब किसान के खेत फैसले बर्बाद हो जाती है तो इससे बड़ा दुख एक किसान के लिए कुछ नहीं है।
किसानों को मुआवजा नहीं
किसान सिमरन सिंह का कहना है सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। फसलेबर्बाद होने के बाद सरकार व उसके जन प्रतिनिधि मुआवजा व स्पेशल गिरदावरी करने के वादे तो करते हैं पर आज तक किसानों के हुए नुकसान पर ना तो किसी किसान को मुआवजा मिला है।
हर साल उठाना पड़ता नुकसान
किसान जगमाल का कहना है इन्हीं दिनों में हर साल किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। बनकट से लेकर खानूवाला तक सोम नदी की पटरी कहीं ना कहीं से टूट जाती है और किसानों की मेहनत उनकी आंखों के सामने तबाह हो जाती है, पर उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
बनकट गांव में निर्माणाधीन पटरी सोम नदी के पानी में बह गई है। पटरी पर लगने वाला पत्थर 24 जून को रिलीज हो चुका था, पर अचानक पानी आने से पटरी का नुकसान हो गया। दोबारा पटरी निर्माण के लिए सरकार से मंजूरी मांगी गई है। - विनोद कुमार, एक्सईएन सिंचाई विभाग।