यमुनानगर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में सभी डॉक्टरों के केबिन में टोकन मशीनें लगवाई थी। जिससे मरीज को जानकारी मिलती थी कि ओपीडी में उसका नंबर कब तक आएगा। वहीं अब अस्पताल के 90 प्रतिशत डॉक्टर टोकन मशीनों को नहीं चला रहे। इससे मरीज परेशान हैं। टोकन मशीन नहीं चलने से मरीज को पता नहीं चलता कि उसका नंबर अब आएगा। मरीजों के मुताबिक ज्यादातर डॉक्टरों ने जानबूझ कर मशीनों को बंद कर रखा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इससे अनभिज्ञ बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 1500 से ज्यादा मरीजों की ओपीडी होती है। भीड़ अधिक होने के कारण ओपीडी में चेकअप के लिए मरीजों में अक्सर धक्का-मुक्की होती रहती है। मरीजों की इस परेशानी को देखते हुए अस्पताल के सभी डॉक्टरों के केबिन में टोकन मशीनें रखीं गईं थीं। केबिन के बाहर बैठा कर्मचारी सभी पर्चियों पर नंबर लिख देता था। ओपीडी में बैठा डॉक्टर चेकअप के बाद मशीन पर अगला टोकन नंबर डाल देता था जो बाहर लगी डिस्प्ले पर दिखता है। इससे मरीज को पता चल जाता है कि उसका नंबर कितनी देर बाद आएगा। यह व्यवस्था शुरूआत में तो ठीक रही, लेकिन अब डॉक्टरों ने टोकन मशीनों को उठाकर एक तरफ रख दिया है।
दर्जनों ऐसी मशीनें हैं जिन्हें कई महीनों से ऑन ही नहीं किया गया। कुछ डॉक्टर ऐसे हैं जो जानबूझ कर मशीनों को चलाना नहीं चाहते। वह अपने केबिन में न बैठ कर यहां वहां बैठे रहते हैं। वह कब सीट पर आएंगे इसकी जानकारी सिवाय डॉक्टर के किसी को नहीं होती। लंबे इंतजार के बाद मरीज जब बाहर बैठे कर्मचारी से पूछते हैं तो हर किसी को एक ही जवाब मिलता है कि डॉक्टर राउंड पर गए हैं या फिर बाथरूम तक गए हैं। तब तक उनके केबिन के बाहर चेकअप के लिए मरीजों का धक्का लगा रहता है। मरीज इंतजार करते रहते हैं कि कब डॉक्टर आएगा और वह चेकअप के बाद दवाई लेंगे। दो से तीन डॉक्टर तो ऐसे हैं जिनके यहां लगी टोकन मशीन नियमित रूप से चल रही है।
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वर्जन
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. नवजोत कौर का कहना है कि डॉक्टर टोकन मशीनें क्यों नहीं चला रहे इसके बारे में पता किया जाएगा। यह मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई थीं। यदि कोई मशीन खराब होगी तो उसे ठीक करवा देंगे।